धाता। क्षेत्र में सड़क, घर, खेत और खलिहान तक बंदरों के झुंड मुसीबत बने हुए हैं। बंदर फसलों को नुकसान पहुंचाने के साथ घरों में घुसकर सामान तोड़ देते हैं। उन्हें भगाने पर महिलाओं और बच्चों पर हमला कर घायल कर देते हैं। इससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।
क्षेत्र के बह्मरौली, टेकारी, अढौली, गोपापुर, गोकुलपुर, भुरचुनी, धाता, नगरुवा, भूला, गलेहरा, बिरधौलपुर, लिहई, डेंडासई, ऐमापुर, भीमपुर, शुकुलपुर, सिहारी, घोसी, भदियापुर, अजरौली, पलवा, सोनारी, रामपुरवा, जनकपुर और केवटमयी समेत कई गांवों में बंदरों का आतंक है।
ग्रामीणों के मुताबिक, बंदरों के डर से खेतों में काम करना मुश्किल हो गया है। घरों में घुसकर बंदर कपड़े, पानी की टंकियां और कैमरे तक तोड़ देते हैं। खाना बनाते समय आटा छीनकर भाग जाते हैं। विरोध करने पर हमला कर देते हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन, ब्लॉक और नगर पंचायत से बंदरों को पकड़वाकर जंगल में छुड़वाने की मांग की है। नगर पंचायत अध्यक्ष रेखा सरोज ने बताया कि पिछले वर्ष करीब 400 बंदरों को पकड़वाकर जंगल में छुड़वाया गया था। बंदरों का आतंक फिर बढ़ने पर उन्हें दोबारा पकड़वाने की व्यवस्था की जाएगी।
फोटो-02-धाता क्षेत्र के सड़कों पर दौडते बंदर। संवाद