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फसल बचाने को किसानों का जीएमआर कंपनी पर धावा

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हसवा। रेलवे लाइन चौड़ीकरण का काम रही जीएमआर इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी की लापरवाही से करीब 10 हजार बीघे खेत में लगी फसल जलमग्न हो गई। गुस्साए किसानों ने सोमवार को कंपनी के कार्यालय पर धावा बोल दिया। जीएम को बंधक बनाया और यह खड़े ट्रक पर पथराव कर दिया। लाठी-डंडे से लैस लोग करीब सात घंटे तक जमे रहे। जेसीबी और पोकलैंड की मदद से सड़क काटकर पानी निकाला गया, इसके बाद किसानों का गुस्सा शांत हुआ।
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जीएमआर इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी ने अपना प्लांट एकारी गांव में बनाया है। शहर से लेकर कई गांवों के पानी की निकासी अभी तक एकारी और रमवां के बीच बने पुल के नीचे स्थित नाले से होती थी। लेकिन जीएमआर का प्लांट लग जाने से यहां से जलनिकासी बंद हो गई। कंपनी की ओर से जलनिकासी के लिए पुलिया बनाकर पाइप डाले गए, लेकन पाइप में सिल्ट जमा होने से पानी की निकासी बंद हो गई। बारिश का पानी एकारी-रमवां के आसपास जमा होने लगा। रमवां, एकारी, बुधइयापुर, मदरियापुर, मुगलचक, बीबीहाट, बिलंदा, जयचंदपुर, फैजुल्लापुर आदि गांवों में चार फीट तक खेतों में पानी भर गया।
इससे नाराज ग्रामीण सोमवार को प्रधान एकारी व अतरहा के साथ कंपनी के जीएम एके बाजपेई से मिले। जीएम ने सड़क काटकर जलनिकासी का आश्वासन दिया। इसके बाद जब सड़क कटवाने के लिए पहुंचे तो जेसीबी चालक ने काम करने से मना कर दिया। कहा कि जब तक अधिकारी आदेश नहीं देंगे, काम नहीं होगा। इस पर ग्रामीणों ने हंगामा शुरू कर दिया।
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सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण जीएमआर दफ्तर के अंदर घुस गए। ग्रामीणों ने कंपनी परिसर में खड़े ट्रक का शीशा तोड़ दिया और कंपनी के विरोध में जमकर नारेबाजी की। सूचना पर रमवां पंथुवा जिला पंचायत सदस्य भुनेश्वर भी मौके पर पहुंच गए। इसके बाद ग्रामीणों ने जीएम को कमरे में बंधक बना लिया। कुछ देर बाद ग्रामीण जीएम को मौके पर ले गए। जीएम ने जेसीबी व पोकलैंड से रोड कटवाई, जिसके बाद पानी तेजी से निकलने लगा। किसान करीब सात घंटे तक मौके पर जमा रहे। हंगामे की सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और किसानों से शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की।
रमवां, मोहनपुर, अतरहा, एकारी, बुधइयापुर, मदरियापुर, मुगलचक, बीबीहाट, बिलंदा, जयचंदपुर, फैजुल्लापुर, मदारीपुर, सहजादेपुर, टीसी के गांव इस जलभराव से ज्यादा प्रभावित हैं।
रोड काटने से जल निकासी की समस्या तो फिलहाल दूर हो गई। लेकिन इसका अभी भी स्थायी समाधान नहीं हो सका है। एक सप्ताह बाद यहां पर दोबारा सड़क बना दी जाएगी, जिसके बाद यहां फिर जलभराव की समस्या होगी। जब तक कंपनी यहां पर बड़ा पुल का निर्माण नहीं कराएगी, तब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो सकता।
जीएमआर कंपनी पिछले छह साल से संचालित है। हर साल ग्रामीणों को इस समस्या से जूझना पड़ता है। पिछले कई दिनों से बारिश होने से लोगों के घरों में पानी घुसने लगा है। हजारों बीघे फसल पानी में डूब गई है। आसपास के ग्रामीण अपनी समस्या को लेकर डीएम की चौखट पर जा चुके हैं। लेकिन इनकी समस्या हल नहीं हो सकी।
जीएमआर कंपनी ने एकारी गांव में मुख्यालय बनाया है। रेलवे चौड़ीकरण का काम मुगलसराय से लेकर कानपुर तक देख रही है। कंपनी अंडरपास पुलों का भी निर्माण करा रही है।
मुगलचक गांव के रहने वाले राजभवन का कहना है कि घरों में पानी घुस गया है। पूरा गांव बाढ़ की चपेट में है। जलनिकासी की व्यवस्था न होने पर पानी एकारी से लेकर बड़े पुल तक भर चुका है। जीएमआर प्रशासन की लापरवाही से हजारों बीघे फसल बर्बाद होने को है।
फैजुल्लापुर के किसान रामखेेलावन पाल कहते हैं कि पहले बारिश का पानी निकल जाता था। लेकिन प्लांट बनने से अब जलनिकासी अवरुद्ध है। केवल फैजुल्लापुर में ही दो हजार बीघे धान की फसल बर्बाद हुई है। हर साल फसल बचाने के लिए सड़क पर उतरना पड़ता है।
बीबीहाट के घनश्याम का कहना है कि अभी तक अधिकारियों के आगे हाथ जोड़ रहे थे, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही थी। मजबूरी में यह कदम उठना पड़ा। बिना हो हल्ला किए समस्या दूर नहीं होती। कंपनी की लापरवाही से फसल बर्बाद हो रही है। किसान के लिए फसल ही उसकी पूंजी है।
एकारी के किसान ठाकुरदीन लोधी का कहना है कि गांव की करीब एक हजार बीघे फसल डूब चुकी है। लगातार तीन दिन से कंपनी जाकर जलनिकासी की व्यवस्था करने को कहा जा रहा था। लेकिन कोई हल नहीं निकला। सोमवार को हंगामे के बाद निराकरण हुआ।
किसानों की समस्या को देखते हुए मौके पर पोकलैंड लगाकर जलनिकासी की व्यवस्था कर दी गई है। ग्रामीणों की समस्या को दूर कर दिया गया है। रोड काटने की वजह से हमारा काम प्रभावित रहेगा। भविष्य में इसका स्थायी समाधान निकाला जाएगा।
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- एके बाजपेई, महाप्रबंधक, जीएमआर कंपनी।
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