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कहीं खेत डूबे तो कहीं बूंद को तरसते किसान

Sun, 19 Jul 2015 12:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहपुर
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मौसम की बेरुखी के शिकार किसानों को अब सिंचाई विभाग से राहत मिलने के बजाय आफत मिल रही है। नहर से मिलने वाला पानी कहीं उम्मीद से ज्यादा और कहीं एक बूंद नहीं मिल रहा है। जनपद की दो प्रमुख नहरों में टेल तक पानी पहुंचाने में विभाग नाकाम है। रोस्टर के मुताबिक निचली गंगा नहर में पानी छोड़े जाने के बाद टेल तक नहीं पहुंच सका। इसी प्रकार रामगंगा नहर में 12 दिन से पानी चल रहा है, लेकिन दर्जनों माइनर अभी भी सूखी पड़ी हैं।
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खरीफ की फसल में रामगंगा नहर में रोस्टर के मुताबिक 7 जुलाई से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है, लेकिन 12 दिन तक पानी चलने के बावजूद नहर में आधे रास्ते तक पानी नहीं पहुंच सका। इससे रामगंगा की बेंती माइनर, बरईखुर्द, सातो, बहरामपुर, पेरी, मीसा, टीकर, बरई बुजुर्ग, मऊ, संवत, भोगलपुर, अजनई, सरसई और अमांव माइनरों में पानी नहीं पहुंचा है। 20 जुलाई से रामगंगा नहर में पानी बंद कर दिया जाएगा। अधिकारियाें की उदासीनता से रामगंगा नहर की एक भी रजबहा व माइनर में रोस्टर के मुताबिक पानी नहीं दिया जाता है। खागा रजबहा से करीब दो दर्जन माइनरें निकली हुई हैं। मकनपुर गांव के राजाराम और बद्री ने बताया कि धान की रोपाई का समय चल रहा है। खांदी कट जाने की वजह से गांव तक पानी नहीं आ रहा है, जिससे धान की रोपाई प्रभावित है। सिल्ट सफाई न होने से जिले की रारी माइनर, कोसभा माइनर, बेनीपुर माइनर, प्रसिद्धपुर माइनर, भोगलपुर माइनर, सरसई माइनर, थरियांव माइनर, सखियांव माइनर, टेक्सारी बुजुर्ग माइनर का अस्तित्व खत्म होने की कगार पर है। निचली गंगा नहर में मनावां-असोथर के पास क्षमता से अधिक पानी आ रहा है। इससे खांदी कटने के आसार पैदा हो गए हैं। लेकिन नरैनी और अकबरपुर बडवा गांव के पास से आगे नहर में पानी नहीं आ रहा है। जिससे विजयीपुर विकास खंड के निहालपुर, एकौरा, शिवुपर, जमकेाइली, सैदपुर भुरुही सहित करीब दो दर्जन गांव और धाता ब्लाक के गनही, पचीसापर, सधुवापुर, खैरई, तक्कीपुर, कठरिया, गुरसंड़ी, भीमपुर, रक्षपालपुर, डे़ंडासई, शुकुलपुर, लिहई, गलेहरा, देवरी और गोढ़वापर सहित करीब आधा सैकड़ा गांवों में धान की रोपाई प्रभावित है। क्षेत्र के इस्लाम, अब्दुल रज्जाक, मोहन सिंह, धनराज सिंह, अजय सिंह, रमेश महराज, गोपाल, लल्लू पाल और बहादुर आदि किसानों ने बताया कि नहर में पानी न आने से धान की रोपाई का काम अभी तक शुरु भी नहीं हुआ है।

ऐसे हो रही पानी की बर्बादी
खागा रजबहा में सैंबसी पुल के पास गुरुवार से खांदी कटने के बावजूद भी विभाग के कर्मचारी व अधिकारी मौके पर देखने नहीं गया है, जिससे हजारों बीघा खेत में पानी भरने के बाद अखनई झील पानी से भरने के कगार पर पहुंच गई है। जबकि माइनरों में खांदी बंधवाने की जिम्मेदारी अवर अभियंता की होती है।
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चहेतों को मिलता काम, कागजों में सिल्ट सफाई
फतेहपुर। जून माह में 18 लाख 57 हजार रुपये से 14 रजबहों की सिल्ट सफाई की गई है। अधिकारियों के कुछ चहेते ठेकेदारों को सिल्ट सफाई का काम मिलता है। इन ठेकेदारों के अलावा अन्य ठेकेदारों को सफाई के टेंडर की भनक तक नहीं लगती है। कार्यदायी संस्थाएं मानक को ताक में रखकर नहर समेत रजबहों की सिल्ट सफाई कराते हैं, जिससे टेल तक पानी पहुंचना तो दूर कई माइनरों व रजबहों का अस्तित्व खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है। फसलों की सिंचाई व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए नहरों की सिल्ट सफाई में प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये खर्च किया जा रहा है लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के चलते नहरों व माइनरों का कायाकल्प होने के बजाय सिंचाई व्यवस्था दिन प्रतिदिन बाधित हो रही है। इससे जिले की दर्जनों माइनरों और रजबहों में टेल तक पानी नहीं पहुंचता है।

कोट
सभी माइनरों के जेई को सख्त निर्देश दिया गया है कि रोस्टर के मुताबिक पानी छोड़ा जाए, जिससे प्रमुख नहर व माइनर और रजबहों के टेल तक पानी पहुंच सके। खागा रजबहा में खांदी की जानकारी मिली है, जिसमें कर्मचारियों को तत्काल खांदी बंधवाने के निर्देश दिए गए हैं। - ओपी चौधरी, अधिशासी अभियंता, रामगंगा नहर।
 
कोट
रजबहों की सिल्ट सफाई कराई जा चुकी है। सिल्ट सफाई का निरीक्षण करने के बाद ही ठेकेदारों को भुगतान किया जा रहा है। कार्य में शिथिलता बरने वाले ठेकेदार के कार्य का भुगतान रोकने की कार्रवाई की जाएगी। - आरके गुप्ता, अधिशासी अभियंता, निचली गंगा नहर।
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