सिख समुदाय के चौथे गुरु रामदासजी का 481वां प्रकाशोत्सव गुरुवार को धूमधाम से मनाया गया। गुरुद्वारा में शबद कीर्तन के बाद श्रद्धालुओं ने लंगर छका। गुरुवार को गुरुद्वारे में सिख समुदाय के लोग पहुंचे और शबद-कीर्तन कर गुरु ग्रंथ साहिब से अरदास की।
बताया गया कि गुरु रामदास साहिब जी का प्रकाश(जन्म) सन् 1534 में लाहौर पाकिस्तान में हुआ था। गुरुजी बचपन से ही शांति प्रथा के पुजारी थे और गुरु नानक जी के चौथे उत्तराधिकारी बने। जीवन काल में जातपांत छुआछूत का भेदभाव दूर कर सत्य का प्रचार किया।
स्वर्ण मंदिर अमृतसर पंजाब में इन्हीं की देन है। अमृत सर तीरथ की स्थापना भी इन्हीं ने की। स्वर्ण मंदिर के चार दरवाजे बनाकर यह भेद दूर किया कि भगवान एक हैं और उन्हीं की संतान हैं। गुरुद्वारे में सुबह से शबद कीर्तन प्रवचन पुष्पांजलि के साथ गुरु का प्रकाशोत्सव मना कर गुरु के जीवन को याद किया गया।
फिर लंगर का वितरण हुआ। इसके साथ ही पंजाब राज्य में धार्मिक ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब का अपमान करने के विरोध में दो सिक्ख शहीद हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। इस दौरान अध्यक्ष संतोष सिंह, पपिंदर सिंह, चानन सिंह, राजिंदर सिंह, जगजीत कौर, जसवीर, हरविंदर, मंजीत कौर, ज्योति कौर, इशर कौर आदि मौजूद रहीं।