अमौली। पति के शहीद होने के बाद तीन दिन की ब्याही पत्नी सियाप्यारी शादी के फेरों का वादा निभा रही है। क्षेत्र के बबई स्थित महेश्वर धाम एवं शहीद स्थल पर सोमवार से सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा एवं रासलीला का आयोजन होगा। शहीद की पत्नी हर साल यह आयोजन कराती हैं।
गांव की सियाप्यारी का विवाह राजपूत रेजीमेंट में तैनात बीस वर्षीय रामदुलारे तिवारी के साथ जून 1965 में हुआ था। उसी समय भारत पाकिस्तान का युद्ध शुरू हो गया और शादी के तीन दिन बाद ही पति को वापस जाना पड़ा। पाकिस्तान के साथ युद्ध में इन्होंने नौ सितंबर को कैप्टन वीर अब्दुल हमीद के साथ तीन टैंक ध्वस्त कर पाकिस्तानी सेना के छक्के छुड़ा दिए थे। 20 सितंबर को इनकी टीम ने एक साथ 70 सैनिकों को ढेर कर पाकिस्तान को युद्ध विराम के लिए मजबूर कर दिया था। युद्ध विराम की घोषणा होते ही घात लगाए बैठे पाकिस्तान के सैनिकों ने बम फेंक दिया, जिसमें वीर सपूत शहीद हो गए थे। तीन दिन के विवाह के बाद विधवा हुई सियाप्यारी तिवारी ने सात फेरों के समय लिए गए संकल्प को सात जन्मों के लिए बांध लिया और वीर शहीद पति की यादों के सहारे जीवन जीने लगी। अपने संसाधनों से 2014 में शहीद पति की प्रतिमा और स्मारक का निर्माण कराया। इसी स्मारक में प्रत्येक वर्ष पुण्य तिथि में आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन कर पति को श्रद्धांजलि समर्पित करती हैं।