कुर्बानी के जज्बे से जुड़ा ईद-उल-अजहा(बकरीद) का त्योहार अकीदत और एहतराम से मनाया गया। मुल्क की तरक्की और अमनचैन कायम रखने के साथ मक्का हादसे में मारे गए हज यात्रियों के गमजदा परिवारों को सदमा बर्दाश्त करने की ताकत देने की दुआएं मांगी गईं।
ईदगाह में हजारों नमाजियों ने बकरीद की नमाज अदा करने के बाद एक दूसरे को गले लगा कर मुबारकबाद पेश की। नमाज के बाद कुर्बानियां देने के साथ लजीज व्यंजनों से मेहमानों की खातिरदारी की गई।
शुक्रवार को आबूनगर स्थित ईदगाह में शहर काजी शहीदुल इस्लाम अब्दुल्ला ने सुबह साढ़े आठ बजे ईद-उल-अजहा की नमाज पढ़ाई।
जगह कम पड़ने पर अकीदतमंदों ने खेतों में दरी व चटाई बिछा करके अल्लाहताला को याद किया। शहर काजी ने अल्लाह ताला को याद करते हुए अपने बंदाें की दुआ कुबूल करने के लिए कहा।
उन्होने मुल्क में नफरत फैलाने वालों के दिलों को पाक साफ कर अमन- चैन और भाईचारा कायम रखने के लिए दुआ की। मक्का हादसे में जान गंवाने वाले हज यात्रियों के गमजदा परिवारों को हिम्मत देेने की दुआ कराई। ईदगाह के अलावा शहर की छोटी-बड़ी मस्जिदों में बकरीद की नमाज अदा की गई।
काजी-ए- शहर कारी फरीदउद्दीन कादरी ने पनी की मस्जिद में नमाज पढ़ी। कादरी ने कहा अल्लाह को अपने बंदों की जानिब से दी जाने वाली कुर्बानी हमेशा प्रिय रही है। उन्होने कहा कुर्बानी शैतान पर इंसान की जीत है। जानवर की कुर्बानी माली कुर्बानी है। काजी-ए-शहर ने बच्चों की तालीम पर खास ध्यान देने की भी अपील की।