फतेहपुर। परिवहन निगम के पास रोडवेज बसों की मरम्मत कराने के लिए पार्ट्स तक नहीं है। छोटे मोटे पार्ट्स बाहर से खरीदे जा रहे हैं जबकि बड़े और महंगे पार्ट्स के लिए कानपुर क्षेत्रीय कार्यशाला का मुंह ताकना पड़ता है। यही कारण है कि खराब हुईं छह बसें वर्कशाप में मरम्मत के लिए कई दिनों से खड़ी हैं।
फतेहपुर डिपो में निगम की 95 बसें संचालित हैं, जिसमें रोज कोई न कोई बस खराबी होती है। इस समय वर्कशाप में रोडवेज की छह बसें बनने के लिए खड़ी हैं। इनके पार्ट्स कानपुर क्षेत्रीय कार्यशाला से मंगाए गए हैं। सीनियर फोरमैन डीएस विश्वकर्मा ने बताया कि जो कम कीमत का सामान होता है, तो उसे बाहर से खरीद लिया जाता है, लेकिन महंगा व बड़ा सामान क्षेत्रीय कार्यशाला से ही मंगाना पड़ता है। इसलिए खराब बस को बनाने में तीन से चार दिन लग जाते हैं।
इस समय एडवांस में कोई भी सामान वर्कशाप में नहीं है। एआरएम एमएल केशरवानी ने बताया कि मई महीने में 12 बसें सरेंडर कर दी गई हैं। छह बसें खराब हैं, जो वर्कशाप में खड़ी हैं। कोरोना महामारी के कारण पार्ट्स भी नहीं मिल पा रहे हैं। इससे बसों की मरम्मत में दिक्कतें आ रही हैं।
एक चालक की सेवा समाप्त, चार को नोटिस
फतेहपुर। बिना सूचना के कई महीने से गायब चल रहे चालक की सेवा समाप्त करने की कार्रवाई की गई है। वहीं, डीजल की ज्यादा खपत करने वाली बसों चार चालकों को नोटिस दी गई है।
एआरएम एमएल केशरवानी ने बताया कि चालक अनिल कुुमार कई महीने से बिना सूचना के गायब है। कई बार नोटिस दी गई, लेकिन अनिल कुमार ने एक भी नोटिस का जवाब नहीं दिया। अब सेवा समाप्त करने की कार्रवाई की गई है। बसों का औसत ऐवरेज प्रति लीटर साढ़े पांच किमी से कम नहीं होना चाहिए। चार बसों का औसत ऐवरेज सवा दो से तीन किमी रहा है। इन बसों के चालकों को नोटिस दी गई है।