फोटो-23-खजुहा के रामलीला मैदान में रावण के विशालकाय पुतले की आरती करते पुजारी। संवाद
बिंदकी। खजुहा का प्राचीन रामलीला मेला साढ़े पांच सौ वर्ष से अधिक पुरानी परंपरा को आज भी संजोए हुए है। यहां रावण का पुतला जलाने के बजाय उसकी पूजा-अर्चना और हजारा आरती की जाती है। सोमवार को पूजा के बाद रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों की शोभायात्रा निकाली गई। मंगलवार को लंका मैदान में राम-रावण युद्ध का मंचन होगा।
सोमवार भोर पहर रावण का पुतला मुगल मार्ग पर बने फाटक के बीच खड़ा किया गया। शाम करीब पांच बजे विधि-विधान से रावण की पूजा और हजारा आरती की गई। गाजे-बाजे के साथ रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों की शोभायात्रा लंका मैदान के लिए रवाना हुई।
रावण की पूजा के बाद भगवान राम की भी आरती की गई। रावण, कुंभकरण और मेघनाद के विशाल पुतले आकर्षण का केंद्र रहे। मेले में महिलाओं ने घरेलू इस्तेमाल, गृहस्थी और शृंगार का सामान खरीदा। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल तैनात रहा। इस मौके पर संजय ओमर, दयाराम उत्तम, अर्जुन तिवारी, चमन गुप्ता, मिंटू गुप्ता और अनुराग सोनी मौजूद रहे।
फोटो-23-खजुहा के रामलीला मैदान में रावण के विशालकाय पुतले की आरती करते पुजारी। संवाद