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Fatehpur News: मृत महिला को पुलिस ने बनाया गवाह, कोर्ट में दाखिल की गलत रिपोर्ट

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अमौली (फतेहपुर)। वाह-री पुलिस...पहले तो प्राथमिकी दर्ज करती नहीं लेकिन जब दर्ज करने के लिए पीड़ित कोर्ट पहुंचा तो एक मामले में मुर्दे को ही गवाह बना डाला। इसके बाद रिपोर्ट भी न्यायालय में दाखिल कर दी। इस चौंकाने वाले खुलासे ने पुलिस की निष्पक्षता, कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
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अमौली कस्बा निवासी विवेक सोनकर (36) ने बताया कि 15 अप्रैल 2025 की रात अर्जुन सोनकर, प्रकाशचंद सोनकर, रितिक सोनकर, गोविंदा और मिथुन ने लाठी-डंडों और चापड़ से उस पर हमला किया था। मारपीट में उसके दोनों पैर टूट गए थे। उसने तहरीर थाने में दी लेकिन पुलिस ने प्राथमिकी नहीं दर्ज की। पिता हीरालाल ने 19 मई 2025 को धारा 173 (4) बीएनएसएस के तहत न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। कोर्ट के आदेश पर विवेचक दिग्विजय सिंह ने दुकानदार ओमप्रकाश, संतोष कुमार, संजीव कुमार और आसमा पत्नी तुफैल के बयान दर्ज किए। इसमें विवेक को नशे में सड़क किनारे पड़ा दिखाया। घुटने टूटने का कारण पिकअप से दुर्घटना बताया।


आरोप है कि पिता ने पुलिस के दबाव में न्यायालय में उपस्थित होकर प्रार्थना पत्र वापस ले लिया था। एसपी को शपथ पत्र देकर दुर्घटना की घटना स्वीकार की थी। इस पर विवेक सोनकर ने फिर से कोर्ट में प्रार्थना पत्र दायर किया। विवेचक और चौकी प्रभारी दिग्विजय सिंह ने सभी पक्षों को बिना बुलाए पुरानी रिपोर्ट के आधार पर ही नई रिपोर्ट तैयार कर कोर्ट में 25 जनवरी 2026 को न्यायालय में प्रस्तुत की जबकि आसमा पत्नी तुफैल की नौ सितंबर 2025 को ही मौत हो चुकी थी। पुलिस ने मृत महिला को भी मामले में गवाह बना दिया। पीड़ित ने अफसरों और न्यायालय से निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
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थाना प्रभारी अमौली विनोद कुमार पटेल ने बताया कि पिता पर कोई दबाव नहीं बनाया गया था। पिता ने खुद ही न्यायालय में पेश होकर प्रार्थना पत्र वापस ले लिया था। इसके बाद बेटे ने न्यायालय में वाद दायर किया। विवेचक मृत महिला का नाम हटाना भूल गए और पुरानी रिपोर्ट ही कोर्ट में पेश कर दी। इसमें सुधार किया जा रहा है।
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