फतेहपुर। पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता का पर्व पितृपक्ष आज से शुरू होगा। 16 दिनों तक चलने वाले इस पक्ष में लोग पितरों का स्मरण कर तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म करेंगे। घरों के साथ गंगा और यमुना तटों पर भी श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है।
पितृपक्ष में दिवंगत परिजन की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध किया जाता है। जिन लोगों को मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती, उनके लिए सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध करने की परंपरा है। श्रद्धालु आज सुबह से स्नान के बाद पितरों का तर्पण करेंगे।
पंडित दुर्गादत्त शास्त्री के अनुसार पितृपक्ष केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी है। इस दौरान परिवार की नई पीढ़ी को पूर्वजों और पारिवारिक परंपराओं से परिचित कराया जाता है।