संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर। कार्यालय की महिला चपरासी को 19 चिटफंड कंपनियों का डायरेक्टर बनाकर संचालकों ने लोगों से लाखों की रकम हड़पी है। संचालकों के खिलाफ धोखाधड़ी का महिला ने मुकदमा दर्ज कराया है।
सदर कोतवाली क्षेत्र के तांबेश्वरनगर निवासी श्रीकांती ने शहर के मुरानइटोला में स्थित चिटफंड कंपनी संचालकों पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया है। कोर्ट के आदेश पर ललौली थाने के दूलापुर निवासी रामआसरे प्रजापति, मुंबई जागेश्वरी उक्ता कोआपरेटिव सोसायटी निवासी डा. पृथ्वीपाल सिंह सेठी, पश्चिम बंगाल के आसनसोल अरविंद नगर निवासी अवधूत कुमार मंडल के खिलाफ कोतवाली पुलिस ने दर्ज किया है।
महिला ने एफआईआर में बताया कि पति रवींद्र कुमार सिंह 1995 में उसे छोड़कर चला गया था। उसने कुछ दिन आरोपी रामआसरे प्रजापति के यहां मजदूरी की। इसी दौरान रामआसरे ने बताया कि उक्ता कोआपरेटिव बोर्ड सोसायटी जागेश्वरी वेस्ट मुंबई में कई कंपनियां धन जमा योजना संचालित करती है। वह कंपनी का डायरेक्टर है। कंपनी में एक महिला चपरासी की जगह है। वह नौकरी को तैयार हो गई।
उसे मुराइनटोला कार्यालय पर 2003 में नौकरी लगवाई। कभी-कभी कार्यालय में चेयरमैन व एमडी डा. पृथ्वीपाल सिंह सेठी, चीफ जनरल मैनेजर अवधूत कुमार मंडल आते थे। दोनों अधिकारियों से कार्यालय में फरवरी 2016 में रामआसरे ने मुलाकात कराई। उसकी नियुक्ति का नवीनीकरण का झांसा देकर तीनों संचालकों ने आधार कार्ड,पैनकार्ड,फोटो जमा कराए।
कुछ फर्मों के सादे स्टांप पेपर व कागजों पर हस्ताक्षर कराए। दिसंबर 2022 में पता लगा कि कई लोगों के साथ धोखाधड़ी हुई है। उसके जमा कागजातों का दुरुपयोग कर 19 फर्जी कंपनियां खोली गई। उसे कंपनियों का डायरेक्टर बनाया गया है। उन कंपनियों के बारे में जानती तक नहीं है। उसके फर्जी हस्ताक्षर बनाकर रसीद, बांड पेपर जारी किए और लोगों से भारी रकम कंपनी में जमा कराई है।
उसने रामआसरे से फर्जीवाड़े का विरोध किया। उसे गाली-गलौज कर जान से मारने की धमकी दी। उसने एक साल पहले पुलिस से शिकायत की थी। कार्रवाई न होने पर कोर्ट की शरण ली। कोतवाल राजेंद्र सिंह ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है।
इनसेट
संचालकों पर करोड़ों के गबन के 15 मुकदमे हैं दर्ज
मुराइन टोला में चिटफंड कंपनियों में सैकड़ों निवेशकों की रकम डूबी है। कोर्ट के आदेश पर कोतवाली में रामआसरे प्रजापति, डा. पृथ्वीपाल सिंह सेठी, अवधूत कुमार मंडल के खिलाफ करीब यह 15 वां मुकदमा है। मुकदमों के बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। पहले के दर्ज मामलों में कुछ साल में रकम दाेगुना का लालच देकर लोगों को जाल फंसाया है। बाद में उन्हें भी एजेंट व कंपनियों का डायरेक्टर बनाकर निवेशकों की रकम हड़पी हैं।