फतेहपुर। संक्रामक व मच्छर जनित बीमारी से अभी तक पांच मौतों का गवाह बन चुके अमौली ब्लाक के मंगलपुर टकौली गांव से लोगों पलायन तो रुक गया है, लेकिन लोगों में दहशत बरकरार है। गांव में बीमारी फैलने को लेकर लोगों में प्रशासन की भूमिका को लेकर खासा रोष है। ग्रामीणों ने बताया कि मौतों के बाद प्रशासन ने मुस्तैदी से काम करना शुरू किया है। यह सब पहले हो जाना चाहिए था। कम से कम जानलेवा स्थिति तो न बनती और लोग गांव छोड़ने को मजबूर न होते। अमर उजाला टीम ने वायरल से ग्रसित इस गांव का सोमवार को जायजा लिया। गांव की गलियां और नालियां साफ दिखाई दीं। लोगों में बीमारी से जल्द निजात मिलने की उम्मीद भी दिखाई दी।
मंगलपुर टकौली पर एक नजर
आबादी.... 2000 मतदाता
उत्पादकता... सब्जी
मौजूदा बीमार लोग..71
कानपुर में इलाज करा रहे लोग...12
पलायन करने वालों की संख्या..10
कुछ इस तरह खामोश हुई जिंदगी
गांव में पहली मौत 17 जुलाई को माया देवी की हुई। 20 जुलाई को रानी देवी ने दम तोड़ दिया। यह दोनों महिलाएं कानपुर के निजी अस्पतालों में भर्ती थीं। 25 जुलाई को गांव के परमू की इलाज के दौरान जहानाबाद के एक निजी नर्सिंग होम में मौत हो गई। 30 जुलाई को कानपुर में ही बुखार पीड़ित सीमा सचान की सांसें उखड़ गईं। एक अगस्त को प्रांशु की मौत हो गई।
गांव में ही ड्रिप चढ़ाने की व्यवस्था हो
मंगलपुर टकौली गांव की जनता चाहती है कि स्वास्थ्य विभाग पिछले सालों की तरह यहां भी प्रयोग करें। बताते चलें कि नोनारा गांव में तीन साल पहले डेंगू ने जबरदस्त हमला बोला था। जिसमें एक-एक करके 13 लोगों की जान चली गई थी। स्वास्थ्य विभाग ने इस गांव में ड्रिप चढ़ाने की भी व्यवस्था करा दी थी। पहले की इस व्यवस्था हालात बिगड़ने पर मंगलपुर टकौली के लोग पक्षधर दिखाई दे रहे हैं।
प्रशासन ने उठाए कदम
5 जुलाई..10 मरीज देखे गए
11 जुलाई.. 25 मरीज देखे गए और दवा का वितरण
14 जुलाई... एंटी लार्वा का छिड़काव किया गया
16 जुलाई.... समूचे गांव में पहली मर्तबा फागिंग कराई गई
20 जुलाई.. डीएम संजीव सिंह ने गांव का निरीक्षण किया
बोले लोग
फोटो परिचय...21 पिछले साल भी कई गांव में संक्रामक बीमारी फैली थी। अगर प्रशासन ने यही तेजी पहले दिखाई होती तो शायद यह हालात न बनते। अभी देर नहीं हुई है। इंद्रपाल इंद्रजीत
फोटो परिचय...20 गांव के हालात पर इधर प्रशासन ने मुस्तैदी से काम करना शुरू किया है। यह सब पहले हो जाना चाहिए था। कम से कम जानलेवा स्थिति तो न बनती। विनय कुमार
फोटो परिचय.. 19 संक्रामक बीमारी के चलते पिता की मौत हो गई। गांव के और 4 लोग बीमारी के चलते जान गवां बैठे। स्वास्थ्य विभाग ने पिछले सालों से कोई सबक नहीं लिया। अच्छेलाल
फोटो परिचय... 18 संक्रामक बीमारी ने बेटे की जान ले ली। प्रशासन को हमारे गांव के बारे में शुरुआत में ही मुस्तैद हो जाना था। यह मुस्तैदी अब देखने को मिल रही है। प्रदीप कुमार