फतेहपुर। मौसम के बाद बीमा कंपनी किसानों को दोहरी मार दी है। 2019 के खरीफ सीजन में ओलावृष्टि और बारिश से नुकसान उठाने वाले ज्यादातर धान किसानों को बीमा कंपनी ने मुआवजा देने से मना कर दिया है। कंपनी के अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि धान की फसल का पानी से किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता है। जबकि ओलावृष्टि के समय राजस्व टीम ने जांच कर रिपोर्ट दी थी कि ज्यादा पानी के कारण पकी खड़ी धान की 90 फीसदी फसल को नुकसान हुआ है।
खरीफ सीजन 2019 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 59688 किसानों की 46952.46 हेक्टेयर धान की फसल का बीमा हुआ था। बीमित फसल की धनराशि दो अरब 13 करोड़ 14 लाख 27 हजार रुपये थी। जबकि कंपनी ने इस फसल के बीमा के लिए प्रीमियम के तौर पर किसानों से चार करोड़ 26 लाख 29 हजार रुपये वसूले थे। जबकि केंद्र और राज्य सरकार का करीब छह-छह फीसदी यानी करीब 12 फीसदी (बीमित धनराशि का) अंश अलग था।
अक्तूबर 2019 में हुई ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश से जिले में 26 हजार 315 हेक्टेयर की फसलें प्रभावित हुई थीं। बीमा कंपनी ने मोटा प्रीमियम वसूलने के बाद जब मुआवजा वितरण शुरू किया तो हाथ 8123 किसानों तक पहुंचकर रुक गए। कंपनी ने इन किसानों को 3.12 करोड़ का मुआवजा बांटा और फिर यह कहते हुए अन्य
किसानों को फसल बीमा का लाभ देने से मना कर दिया कि धान की फसल को पानी से नुकसान नहीं होता है। इसी के साथ बीमा कंपनी ने राजस्व विभाग की रिपोर्ट को भी दरकिनार कर दिया, जिसमें जिक्र किया गया था बड़े क्षेत्रफल में किसानों को बारिश और ओलावृष्टि से नुकसान हुआ है। करीब सात माह से मुआवजे का इंतजार कर रहे किसान अब बीमा कंपनी के इस रवैये से खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
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मलवां ब्लाक के कंसपुर गुगौली गांव के किसान नरेश सिंह का खाता से 1369 रुपये फसल बीमा के नाम पर काटा गया। नरेश सिंह की आठ बीघा फसल ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश से नष्ट हो गई। किसान का कहना है कि राजस्व विभाग की टीम जब जांच करने आई थी। उसमें 90 प्रतिशत फसलों का नुकसान होना बताया था।
मलवां ब्लाक के दलाबला खेड़ा गांव निवासी सत्यनारायन भदौरिया का कहना है कि केसीसी से बीमा कंपनी को 1369 रुपये बैंक ने जमा करा दिए हैं। इसकी सूचना भी नहीं थी। जब पासबुक में दर्ज कराया तो पता चला। नुकसान की भरपाई के लिए बैंक गए तो बताया गया कि बीमा कंपनी जांच करने के बाद मुआवजा देगी।
मलवां ब्लाक के यादगारपुर निवासी रुद्रपाल के केसीसी से 670 रुपये बीमा के नाम पर काटा गया है। चार बीघा धान की फसल रही है। ओलावृष्टि के बाद कृषि विभाग में फसलों की जांच कराने की शिकायत भी दर्ज कराई थी। लेखपाल और बीमा कंपनी के कर्मचारी फसलों की जांच करने भी आए थे, लेकिन मुआवजा नहीं दिया गया है।
मलवां ब्लाक के यादगापुर गांव निवासी किसान राजेश के केसीसी से 915 रुपये फसल बीमा का प्रीमियम लिया गया है। छह बीघा धान की फसल थी। बेमौसम बारिश में धान की फसल पूरी नष्ट हो गई थी। फिर भी बीमा कंपनी की तरफ से एक रुपये भी नहीं मिला है। कंपनी ने किसानों को ठगा है। अधिकारी भी इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
उप कृषि निदेशक अनिक कुमार पाठक ने बताया कि बीमा कंपनी अधिकारी गाइडलाइन में पानी से धान की फसल का नुकसान न होने की बात कहा रहे हैं। इस बात को मीटिंग में कई बार कहा जा चुका है कि धान की फसल खेतों में पानी भरने के कारण बर्बाद हुई है। लेकिन बीमा कंपनी मुआवजा देने से आनाकानी कर रही है। शासन को रिपोर्ट भी भेज चुके हैं।