फतेहपुर। लॉकडाउन के दौरान जरूरतमंदों को दो वक्त का भोजन मुहैया कराने के लिए बने सामुदायिक किचन में अनदेखी नजर आई। जिला मुख्यालय के इस किचन में काम करने वालों ने ना तो मॉस्क पहन रखा था और ना ही हाथ में ग्लब्स थे। किचन में सोशल डिस्टेंसिंग का भी ख्याल नहीं दिखा।
जिले की तीनों तहसीलों में मजलूम और मजबूर तबके के लिए प्रशासन ने सामुदयिक किचन शुरू किए हैं। बिंदकी, खागा और शहर में इनका संचालन हो रहा है। दो दिन पहले तक डाक बंगला में चलने वाले सामुदायिक किचन को सदर तहसील पहुंचा दिया गया लेकिन यहां पर प्रशासनिक अनदेखी साफ नजर आई। इस किचन में 12 लोग लगाए गए हैं। दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर यहां पर सीताफल की सब्जी काटी जा रही थी और पूरी, रोटी
बेलने को लोई तैयार की जा रही थीं। एक महिला इस काम को अंजाम दे रही थी। पहले कमरे में मौजूद चार लोगों में किसी के चेहरे पर मॉस्क नहीं था। हाथ भी ग्लब्स भी नहीं थे। ऐसा ही अंदर के कमरे में जल रहे चूल्हा के पास नजर आया। खाना पकाने वाला भी नंगे हाथ था और चेहरा भी मास्क से खाली। यहीं की व्यवस्था में लगाए गए लेखपाल चिंतारमण पांडेय ने बताया कि सभी को मॉस्क और ग्लब्स दिए जा चुके हैं। कुछ ने उतार कर रख लिए हैं। मानक और सुरक्षा का ख्याल रखा जा रहा है। सदर तहसील के सामुदायिक किचन में एक तश्तरी में दाल रखी थी। पूछने पर लेखपाल ने बताया कि यह दाल यहां काम करने वालों के लिए है।
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