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लॉकडाउन: पायन का सच उगल रहा तिरहार

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फतेहपुर। लॉकडाउन से उबरने में जिले की बेरोजगारी व विकास के दावों की सही तस्वीर भी सामने आ रही है। खासकर तिरहार के गांवों में महानगरों से पलायन कर आने वालों का मंजर देखते बन रहा है। विभिन्न प्रांतों की सीमाएं सील होने के बावजूद मजदूर, कर्मचारी पैदल ही अपने गांवों को पहुंच रहे हैं। हाईवे किनारे, बस अड्डे पर जमा ज्यादातर लोगों से बस यही कहते सुना गया कि ‘अपने यहां काम मिले तो बाहर जाने की जरूरत ही क्या है’।
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बहुआ ब्लाक के गाजीपुर की आबादी करीब सात हजार है। यहां हर चौथे-पांचवे घर का कोई न कोई सदस्य मुंबई और दिल्ली कमाता है। 48 घंटे के दौरान गांव में 35 लोग आ चुके हैं। इसी ब्लाक के एकारी गांव की आबादी पांच हजार है। यहां पर 24 घंटे में ही 50 लोग महानगरों से लौट कर आए हैं। खजुहा ब्लाक के धौरहरा गांव का भी कमोबेश यही हाल है।
कोरोना के संक्रमण को लेकर उठाए जा रहे कदमों के बाद इस गांव की बेरोजगारी की असलियत एक बार फिर सरेआम हो गई। यह ऐसे गांव हैं जहां होली, दीपावली में ही पुरुष नजर आते हैं। बाकी दिनों में बुजुर्ग, बच्चे और महिलाएं ही दिखाई पड़ती हैं। बदले हालात ने इस गांव के मिथक को तोड़ दिया है। बहुआ ब्लाक के ललौली कस्बे के 80 फीसदी लोग मुंबई और सऊदी में काम करते हैं। सोमवार को इस बड़े गांव में 34 लोग दाखिल हो चुके थे।
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केंद्र सरकार के सख्त होने का असर सोमवार को शहर की सड़कों पर दिखा। हाईवे पर पुलिस तैनात रही। दो चार के गुट में दिखने वाले लोगों को रोक कर उन्हें स्क्रीनिंग के लिए मुफीद जगह पहुंचाने का काम करती रही। नऊवाबाग समेत सात जगह पर प्रवासी मजदूरों की स्क्रीनिंग की गई। सदर अस्पताल के फीवर हेल्थ डेस्क में पूरी ओपीडी के दौरान लंबी लाइनें लगीं रहीं।
कोरोना वायरस के खौफ ने अपनों के व्यवहार को बदल कर रख दिया है। जो बेटा कमाऊपूत था, अब उसे घर में प्रवेश देने से पहले तरह तरह के सवाल किए जा रहे हैं। कई गांवों में महानगरों से गांव मजदूरों को अंदर घुसने से रोका जा रहा है। इन्हें पहले स्वास्थ्य जांच कराने को कहा जा रहा है उसी के बाद गांव में दाखिला मिल रहा है। कहींलौटने वाले को ट्यूबवेल में रखा जा रहा है तो किसी को गरम पानी से नहलाने के बाद घुसने की इजाजत दी जा रही है।
केंद्र सरकार की सख्ती के बाद जिले की सारी सीमाओं को सील कर दिया गया। इन सीमाओं पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की गई। कई कई थाना का फोर्स लगाया गया ताकि किसी लोगों को समझा बुझाकर लॉकआउट का फालो कराया जा सके। खुद एसडीएम और डीएसपी भी लगातार इन प्वाइंट की हकीकत से वाकिफ होते रहे। जिन लोगों के पास है या एंबुलेंस में मरीज है। इन्हीं को इंट्री दी जा रही है। अगर किसी वाहन में भी मरीज है तो उसे जाने दिया जा रहा है।
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