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थरियांव सीएचसी को बनाया कोविड हास्पिटल

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रियांव सीएचसी में मॉकडिल करते स्वास्थ्य कर्मी - फोटो : FATEHPUR
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फोटो- मॉकड्रिल करता स्टाफ
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थरियांव सीएचसी को बनाया कोविड हॉस्पिटल
- लेबल वन श्रेणी के इस हास्पिटल में तीस संक्रमित किए जा सकते हैं भर्ती
- विदेश यात्री या इनके संपर्क में आए शख्स को ही रख कर किया जाएगा इलाज
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर। जिला स्तर पर महामारी से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पूरी तरह से कमर कस ली है। कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के लिए थरियांव सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) को अत्याधुनिक संसाधनों से लैस कर कोविड हास्पिटल में तब्दील कर दिया गया है। इस हास्पिटल में कोरोना पॉजिटिव मरीजों को ही भर्ती किया जा सकेगा। सीएचसी के व्यवस्थित संचालन को डॉक्टर, नर्स समेत 50 की संख्या में पैरामेडिकल स्टाफ लगाया गया है। स्टाफ को दो भागों में रखा गया है। इन्हें 14-14 दिन की निर्बाध ड्यूटी करनी होगी।
जिस तरह से कोरोना वायरस फैलता जा रहा है, उससे जिले स्तर पर भी कोविड हास्पिटल तैयार कर लिया गया है। शहर से 24 किलोमीटर दूर स्थित इस कोविड हास्पिटल में फिलहाल 30 कोरोना संक्रमित मरीजों के भर्ती कर उनका इलाज करने की व्यवस्था है। थरियांव में बनी सीएचसी में जगह इतनी है कि यहां पर 60 बेड तक की व्यवस्था आराम से हो सकती है। कोरोना संक्रमित व्यक्ति को 28 दिन भर्ती रखना है, ऐसे में आधा सैकड़ा कार्मिक वाले इस अस्पताल के स्टाफ को दो हिस्सों में बांटा गया है। प्रत्येक हिस्से को 14-14 दिन की ड्यूटी देनी होगी। जिला महामारी विज्ञानी डॉ. अदुल्ल्ला ने बताया कि कोविड हास्पिटल के लिए थरियांव सीएचसी मुफीद रही। इस हास्पिटल में वही रखा जाएगा जिसका रिजल्ट पॉजिटिव होगा। अभी तक जिला सर्विलांस टीम को 270 विदेश यात्रियों के लौटने की सूची आ चुकी है। इनमेें से 41 का पता नहीं चल पा रहा है। एक जर्मनी और एक इंफाल से लौटे युवक का संशय के आधार पर ब्लड सैंपल लखनऊ भेजा गया जो निगेटिव रहा।
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इनसेट-
मॉकड्रिल में कोरोना संक्रमित से जूझता दिखा स्टाफ
फतेहपुर। थरियांव सीएचसी में तैयार किए गए कोविड हास्पिटल के स्टाफ को रविवार रिहर्सल कराया गया। जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. केके श्रीवास्तव और जिला महामारी विज्ञानी डॉ. अब्दुल्ला की मौजूदगी में कोविड हास्पिटल के समूचे स्टाफ को पीपीई किट के बारे में बारीकी से जानकारी दी गई। मसलन, किट को किस तरह से पहनना है किस तरह से उतारना। ऐसा करते वक्त सचेत रहने को कहा गया। रिहर्सल के दौरान एंबुलेंस से लाए गए मरीज को बेड तक पहुंचाने से लेकर दवाएं देने का प्रयास काबिलेगौर रहा।
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