फतेहपुर। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए सुरक्षा किट उपलब्ध न कराने से नाराज 108, 102 व एएलएस एंबुलेंस का संचालन एक अप्रैल से बंद हो सकता है। इस सेवा को देने वाले ईएमटी और पायलट की जेब खाली हो चुकी है। सुरक्षा के नाम पर ग्लब्स व मॉस्क तक से स्टाफ वंचित है। इस वक्त यही नाराजगी की मूल वजह बनती जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि सबसे पहला जोखिम तो वही उठाते हैं। इसके बावजूद उन्हेंकोई सुनने को तैयार नहीं है। एंबुलेंस यूनियन के जिलाध्यक्ष ने कहा कि 31 मार्च तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया जाता है तो एंबुलेंस कर्मी हड़ताल पर चले जाएंगे।
कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन हुए समूचे मुल्क के बीच आपातकालीन सेवा की हर कड़ी मायने रखती है। खासकर स्वास्थ्य विभाग के लिए यह बात और भी अहमियत रखने वाली है। दस्तक दे रही आपदा से मोर्चा यही विभाग सीधे तौर पर ले रहा है। जिले में 270 का स्टाफ, 108, 102 व एएलएस एंबुलेंस के संचालन में लगा है। इस स्टाफ का कहना है कि उसे बिना किसी एहतियात के ड्यूटी पर लगाया जा रहा है। हर तरीके के मरीज लाने पड़ते हैं इसके बावजूद हाथ में पहनने को न ग्लब्स दिए जाते हैं और न ही मुंह ढंकने को मॉस्क। अभी हाल ही में
एक दो मामले ऐसे आए जब मरीज को लाने के मामले में एंबुलेंस कर्मियों में असंतोष देखा गया। जीवनदायिनी 108, 102 व एएलएस एंबुलेंस यूनियन के जिलाध्यक्ष अवनीश पांडेय कहते हैं कि सरकार का नजरिया समझ से परे हैं। सरकार, कोरोना से जुड़े काम में लगे कर्मचारियों को बीमा का लाभ दे रही है लेकिन इस लायक एंबुलेंस कर्मी को नहीं समझा गया है। सरकार हमको कर्मचारी नहीं समझती है तो हम भी काम करने को बाध्य नहीं हैं। जिलाध्यक्ष ने कहा कि 31 मार्च तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया जाता है तो एंबुलेंस कर्मी हड़ताल पर चले जाएंगे।
उत्तर प्रदेश राजस्व संग्रह अमीन संघ ने कोरोना के बचाव के प्रयास में मददगार बनने का फैसला लिया है। जिलाध्यक्ष शिवकरन सिंह ने डीएम संजीव सिंह से मुलाकात करके जिले भर के संग्रह अमीनों का एक-एक दिन का वेतन, मुख्यमंत्री राहत कोष में देने की पेशकश की। अध्यक्ष ने बताया कि ऐसी घड़ी में जो जितना दूसरों के लिए काम आ जाए, वह कम है।