फतेहपुर। नवरात्र का शुक्रवार को तीसरा दिन रहा। मां दुर्गा के तीसरे रूप चंद्रघंटा की पूजा हुई। पूजा-अर्चना के साथ सेब और गुड़ का प्रसाद चढ़ाया गया। घंटी व शंख बजाकर सुख शांति की कामना की गई।
मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों का पूजा करने के लिए घरों में भक्तों ने कलश स्थापित किया है। माता के तीसरे स्वरूप को शुक्रवार को भक्तों ने गाय के दूध से बने मिष्ठान, सेब, गुड़ का भोग लगाया। माता दुर्गा की आरती की। आचार्य दुर्गादत्त शास्त्री ने मां चंद्रघंटा की पूजा के महत्व को बताते हुए कहा कि देवी के मस्तक पर घंटे के आकर का अर्धचंद्र है। इसीलिए देवी के इस रूप को चंद्रघंटा कहा जाता है। माता चंद्रघंटा की पूजा करने से भक्त के सभी पाप और बाधाएं दूर हो जाती हैं। इसलिए भक्तों को नवदुर्गा के इस स्वरूप की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करना चाहिए। इससे सांसारिक कष्टों से मुक्ति और सुखी जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होगा। देवी के शरीर का रंग सोने जैसा चमकीला है। देवी के 10 हाथ हैं। देवी अपने दस हाथों में खड़क, तलवार, ढाल, गदा, पाश, त्रिशूल, चक्र, धनुष, भरे हुए तरकश लिए हैं, जो साधकों को मुग्ध करते हैं। इनका वाहन सिंह है। इनकी पूजा करने से साधक को निर्भय बनाता है। साधक सौम्य और विनम्र बनता है। साधक के मुख, नेत्र तथा संपूर्ण काया में एक अद्भुत चमक की वृद्धि होती है।