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वाहनों की रफ्तार तो तय कर दी लेकिन रोकने के इंतजाम नहीं

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No arrangements for stopping the speed limit of vehicles - फोटो : FATEHPUR
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सड़क हादसों में कमी लाने के लिए एआरटीओ विभाग सभी मार्गों पर वाहनों की रफ्तार का मानक तय करने के बाद खामोश होकर बैठ गया है।
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वाहनों के तीव्र गति से दौड़ने से हादसे लगातार हो रहे हैं। यातायात व्यवस्था भी चौपट है। कार्रवाई सिर्फ चालान तक सिमट कर रह गई है।
जिले में पिछले महीने मुख्य सड़कों पर वाहनों की रफ्तार तय की गई थी। एआरटीओ विभाग की ओर से हर मार्ग पर अधिकतम कितनी गति से चलना है इसके आदेश जारी किए गए।
एआरटीओ के मुताबिक जिले की 36 सड़कों पर दो पहिया/तीन पहिया वाहनों की स्पीड 40 किलोमीटर प्रतिघंटा, चालक समेत सात सीटों वाले वाहनों की स्पीड 60 किलोमीटर प्रतिघंटे, चालक समेत आठ से 12 सीटों तक यात्री वाहनों की स्पीड 60 किलोमीटर प्रतिघंटे, सभी माल वाहन और बड़े यात्री वाहनों की स्पीड 50 किलोमीटर प्रतिघंटे तय की गई है।
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यह योजना धरातल पर उतरती नहीं दिख रही है। एआरटीओ एके त्रिवेदी ने बताया कि एनएचआई और पीडब्ल्यूडी विभाग से पत्राचार किया गया है। उन्हें बजट लेकर सड़कों पर रफ्तार के संकेतांक लगाने हैं।
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जिले का एआरटीओ विभाग कानपुर जोन में आता है। स्पीड नापने के लिए पूरे जोन में एक स्पीड गन है। इससे वाहन की रफ्तार का नापी जाती है।
यह यंत्र जिले में नहीं है। इसका जिले में कभी इस्तेेमाल भी नहीं हुआ। यही वजह है कि जिले में वाहन कितनी रफ्तार में चलते हैं। इसका कोई मानक नहीं तय करता है। ओवरस्पीड में चालान हवाहवाई ही होते हैं।
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