फतेहपुर। खेतों में अंधाधुंध उर्वरक इस्तेमाल से मिट्टी के आवश्यक पोषक तत्व तेजी से घट रहे हैं। इसे देखते हुए कृषि विभाग किसानों को संतुलित उर्वरक विशेषकर एनपीके के इस्तेमाल की सलाह दे रहा है। विभाग का कहना है कि एनपीके में मौजूद नाइट्रोजन, फास्फोरस और सल्फर फसल की उत्पादकता बढ़ाने में सहायक होते हैं।
जिला कृषि अधिकारी नरोत्तम कुमार ने बताया कि रबी फसलों की बोआई के लिए यूरिया, डीएपी और एनपीके समितियों पर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। किसानों से अपील की गई है कि वे केवल आवश्यकतानुसार ही उर्वरकों का इस्तेमाल करें।
एनपीके में 20-20 फीसदी नाइट्रोजन और फास्फोरस के साथ 13 फीसदी सल्फर होता है। नाइट्रोजन और सल्फर की संयुक्त मौजूदगी फसलों के पोषण में अधिक प्रभावी होती है। खासतौर पर तिलहनी फसलों में सल्फर तेल की मात्रा और गुणवत्ता दोनों बढ़ाने में उपयोगी है।
एनपीके का इस्तेमाल खाद्यान्न, दलहनी, तिलहनी फसलों के साथ-साथ आलू और गन्ने में भी किया जा सकता है। वहीं टीएसपी (ट्रिपल सुपर फॉस्फेट) में 46 फीसदी फास्फोरस होता है, जो पौधों की जड़ों को मजबूत बनाता है। उपज बढ़ाता है। यह जल्दी घुलने वाला पोषक तत्व है, जिससे गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार होता है।