चैत्र मास का नवरात्र पर्व शुक्रवार से शुरू हो रहा है। इस बार वासंतिक नवरात्र का प्रारंभ शुक्रवार और समापन भी शुक्रवार को हो रहा है। धर्मग्रंथों के अनुसार नवरात्र में हर तिथि पर माता के एक विशेष रूप की पूजा होती है। जिसकी आराधना से भक्तों की मनोकामना पूरी हो जाती है। नवरात्र पर्व में पूजा की तैयारी गुरुवार को ही पूरी कर ली है। जानिए नवरात्र पर्व में कौन सी देवी का किस दिन करें पूजन।
हिमालय की पुत्री हैं मां शैलपुत्री
नवरात्र पर्व के पहले दिन शैलपुत्री की पूजा होती है। मारकंडेय पुराण के अनुसार देवी का यह नाम हिमालय के यहां जन्म होने से पड़ा। मां शैलपुत्री को अखंड शौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। नवरात्र के पहले दिन योगीजन अपनी शक्ति को मूलाधार में स्थित करते हैं और योग साधना करते हैं। हिमालय की पुत्री होने से यह देवी प्रकृति स्वरूपा भी हैं। स्त्रियों के लिए उनकी पूजा करना ही श्रेष्ठ और मंगलकारी है।
तप की शक्ति मां ब्रह्मचारिणी
नवरात्र की द्वितीय तिथि पर मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। देवी ब्रह्मचारिणी ब्रह्मा शक्ति यानी तप की शक्ति का प्रतीक हैं। इनकी आराधना से भक्त में तप करने की शक्ति बढ़ती है और साथ में सभी मनोवांछित कार्य पूर्ण होते हैं
सांसारिक कष्टों से मुक्ति देतीं माता चंद्रघंटा
नवरात्र के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा को समर्पित है। यह शक्ति माता का शिवदूती स्वरूप है। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है। इसी से इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। असुरों के साथ युद्ध में देवी चंद्रघंटा ने घंटे की टंकार पर असुरों का नाश किया था। इनके पूजन से साधक को सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिल जाती है।
रोग, शोक दूर करती हैं मां कूष्मांडा
नवरात्र के चतुर्थी तिथि की प्रमुख देवी मां कूष्मांडा हैं। इनकी भक्ति करने वाले श्रद्धालुओं को धन, धान्य के साथ स्वास्थ्य अच्छा रहता है। चतुर्थ रूपी कूष्मांडा ने अपने उदर से ब्रह्मांड को उत्पन्न किया है। इसी वजह से दुर्गा के इस स्वरूप का नाम कूष्मांडा पड़ा।
स्कंद माता की पूजा से सुखशांति
पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा की जाती है। इनकी पूजा से भक्तों को सुख-शांति मिलती है। स्कंदमाता हमें सिखाती हैं कि जीवन स्वयं ही अच्छे बुरे के बीच एक देवासुर संग्राम हैं। उसके हम खुद ही अपने सेनापति हैं। माता की पूजा से हमें सैन्य संचालन की शक्ति मिलती है। इसलिए स्कंदमाता की पूजा की जाती है।
भय नाशक देवी कात्यायनी
नवरात्र के षष्ठी तिथि पर आदिशक्ति दुर्गा के कात्यायनी स्वरूप के पूजा का विधान है। महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने पुत्री के रूप में जन्म लिया था। इसलिए कात्यायनी कहलाती हैं। माता की आराधना से रोग, शोक, संताप, भय आदि सर्वथा विनष्ट हो जाते हैं।
शत्रुओं का नाश करती है मां कालरात्रि
महाशक्ति मां दुर्गा का सातवां रूप है। मां काल का नाश करने वाली हैं। इनकी साधना से भानुचक्र की शक्तियां जागृत होती हैं। मां अपने भक्तों की समस्या को पल भर में हल करने की शक्तियां प्रदान करती हैं। शत्रुओं का नाश करने वाली मां कालरात्रि अपने भक्तों को हर परिस्थिति में विजय दिलाती हैं।
मन की शांति के लिए मां गौरी
नवरात्र के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। मां गौरी का रंग अत्यंत गोरा है, इसलिए इन्हें महागौरी कहा जाता है। नवरात्रि के आठवें दिन पूजा कर शरीर का सोम चक्रजागृत किया जाता है। इस चक्र से संबंधित सभी शक्तियां श्रद्धालुओं को प्राप्त हो जाती हैं।
सुख-समृद्धि के लिए मां सिद्धिदात्री की पूजा
मां सिद्धिदात्री की पूजा चैत्र नवरात्र के अंतिम दिन की जाती है। मां भक्तों को हर प्रकार की सिद्धि प्रदान करती हैं। इनकी पूजा अर्चना से अनेक प्रकार की शक्तियां स्वत: ही भक्त को प्राप्त हो जाती हैं।