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खीर, पूड़ी, हलवा का भोग लगाकर मां सिद्धिदात्री की पूजा

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फतेहपुर। चैत्र नवरात्र की नवमी पर गुरुवार को महानवमी पर्व मनाया गया। मां दुर्गा के नौवें स्वरूप माता सिद्धिदात्री की विधि विधान से पूजा हुई। खीर, पूड़ी, हलवा, मालपुआ, केला, नारियल और मिष्ठान का भोग लगाया गया। साथ ही मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की पूजा कर सुख, शांति का आशीर्वाद मांगा गया।
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मां दुर्गा के नवें स्वरूप माता सिद्धिदात्री की पूजा के लिए लोगों ने घर में पकवान बनाए। माता की आरती के बाद कोरोना को ध्यान में रख कर कन्याओं को प्रसाद खिलाया गया। सोशल डिस्टेंस का ध्यान रखा गया। हथगाम के संवत के मजरा पलवा में एक-एक मीटर की दूरी पर गोला बनाकर उनमें कन्याओं को बैठाया।
वहीं कुछ लोगों ने घर में बने पकवान के लंच पैकेट बनाकर कन्याओं को वितरित किए। साथ ही कन्याओं को दान देकर विदा किया। आचार्य दुर्गादत्त शास्त्री ने बताया कि मां सिद्धिदात्री की पूजा करने से व्यक्ति को कार्य सिद्धि प्राप्ति होती है। शोक, रोग और भय से भी मुक्ति मिलती है।
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देव, गंदर्भ, असुर, ऋषि भी सिद्धियों की प्राप्ति के लिए मां सिद्धिदात्री की आराधना करते हैं। देवों के देव महादेव भी इनकी पूजा करते हैं। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का जन्म हुआ था। इस तिथि को रामनवमी के नाम से जाना जाता है।
नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री के साथ भगवान राम की पूजा करने से घर में सुख शांति होती है। आचार्य दुर्गादत्त शास्त्री ने कहा कि कमल के फूल पर विराजमान और सिंह की सवारी करने वाली मां सिद्धिदात्री चार भुजाओं में गदा, चक्र, कमल का फूल और शंख धारण करती हैं।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्मांड के आरंभ में सर्वशक्तिमान देवी आदि पराशक्ति भगवान शिव के शरीर के बाएं भाग पर सिद्धिदात्री स्वरूप में प्रकट हुई थीं।
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