दर्जा आदर्श रेलवे स्टेशन का। सुविधाएं और सुरक्षा राम भरोसे। जिले के रेलवे स्टेशन का कुछ यही हाल है। प्लेटफार्म के विस्तारीकरण के बाद अभी तक टीनशेड नहीं लगाया गया। सुरक्षा की बात करें तो स्टेशन परिसर में कहीं से भी प्रवेश किया जा सकता है। सुरक्षा के लिए लगा मेटल डिटेक्टर भी खराब पड़ा है।
हाल यह है कि स्टेशन के किनारे अराजकतत्वों, शोहदों का जमावड़ा रहता है। यात्रियों ने बताया कि ट्रेनों के विलंब होने पर सबसे ज्यादा सामान की सुरक्षा को लेकर चिंता रहती है।
दिल्ली-हावड़ा रूट के आदर्श रेलवे स्टेशन से रोजाना औसतर चार हजार लोग यात्रा करते हैं। इसके बावजूद यहां पर सुरक्षा के खास इंतजाम नहीं दिखाई दे रहे हैं।
दो साल पहले सुरक्षा की दृष्टि से मेटल डिटेक्टर मशीन के कुछ समय बाद खराब होने के बाद से इसे काम करते नहीं देखा जा सका है। हालात यह है कि स्टेशन के अंदर कोई भी व्यक्ति आसानी से दाखिल हो जाता है।
प्लेटफार्म में प्रवेश करने वाले मुख्य द्वार व निकासी द्वार के अलावा पूरब व पश्चिम की ओर से धड़ल्ले से स्टेशन के अंदर आ जाते है।
गौरतलब रहे कि पूरब में आरपीएफ व पश्चिम में जीआरपीएफ के थाने हैं। बावजूद लोग बेपरवाह होकर अंदर-बाहर होते रहते हैं। देहरादून जा रहे यात्री राम सिंह का क हना है कि यहां कोई सुरक्षा न होने से गाड़ियों की इंतजार करने के दौरान सामान चोरी होने का डर बना रहता है।
सरकारी कर्मचारी पवन गुप्ता का कहना है कि नाम का आदर्श रेलवे स्टेशन है। इसे खाला का घर कहना ज्यादा अच्छा होगा। कौशांबी में नौकरी करने वाली रेखा का कहना है कि यह स्टेशन पार्क बन कर रह गया है। रोक टोक नहीं होने से शोहदे प्लेटफार्म में मंडराते रहते हैं।
स्टेशन का सुदंरीकरण हो रहा है। और सुरक्षा का ध्यान भी रखा जाता है। मेटल डिटेक्टर मशीन भी जल्द कम करने लगेगी। -आर एल प्रसाद, स्टेशन अधीक्षक फतेहपुर।