सर्द हवाओं से हाड़कंपाऊ ठंड का कहर तेज हो गया है।
दोपहर तक कोहरा व बदली रही। जिससे सूरज के दर्शन नहीं हुए। शाम को बारिश की
कुछ बूंदे गिरीं। इससे मौसम में गलन और बढ़ गई है। वैसे सोमवार को दोपहर
में धुंध छंटती नजर आई, लेकिन बादल की चादर ने फिर ढक लिया। जिससे पूरे
दिन कड़ाके की ठंड का असर रहा। लोग घरों में दुबके रहे। कोहरे का असर
ट्रेनों और सड़क पर चलने वाले वाहनों पर दिखा। ट्रेनें लेट पहुंची और वाहन
रेंगते हुए चले।
शीतलहर से दो दिन में पारा 11 से लुढ़क कर सात डिग्री
हो गया है। कड़ाके की ठंड का असर सुबह से ही दिखाई दिया। शहर की सड़कों पर
सुबह स्कूली बच्चों के अलावा यदाकदा ही लोग नजर आए।
दिन चढ़ने के बाद शहर
की गलियों में चहल-पहल दिखाई दी। पूरे दिन धूप न निकलने से लोग बेहाल रहे।
बाजार और दफ्तरों में लोग ठिठुरते दिखे। जाकेट और मफलर से कसे होने के बाद
भी लोग ठंड से कांपते रहे।
ठंड से गरीब मजदूरों की समस्याएं बढ़ गई हैं।
जहां सर्द हवा, कोहरा व ठंड से फसलों में सुधार को लेकर किसानों के चेहरे
पर रौनक आ गई है। वहीं रोज कमाने खाने वाले गरीबों के सामने संकट का दौर
शुरू हो गया है।
कड़ाके की ठंड पड़ने से मजदूरों को मजदूरी नहीं मिल रही
है। रिक्शा चलाने व ठेला लगाने वाले गरीबों का रोजगार भी फीका हो गया है।
सोमवार
को मुरी डाउन, तूफान अप और आनंद विहार-कोलकता डाउन रद्द रही। ट्रेनों के
इंतजार में मुसाफिर पूछताछ केंद्र पर जानकारी लेते रहे। कई ट्रेन रद्द होने
से अन्य ट्रेनों में मुसाफिरों की भीड़ दिखाई दी।
जोधपुर हावड़ा, नंदन
कानन, नार्थ ईस्ट और कालका घंटों देरी से स्टेशन पर पहुंची। रोडवेज बसों की
रफ्तार पर कोहरा की धुंध ने ब्रेक लगा दी है।
कानपुर-इलाहाबाद हाईवे पर
धुंध की वजह से छोटे व भारी वाहन लाइट जला कर रेंगते रहे। दिल्ली-बनारस रूट
की रात्रि सेवा वाली बसें सुबह देरी से बस अड्डे पर पहुंची। बसों का
इंतजार करने वाले यात्री ठंड से कांपते रहे। चाय पीकर लोग ठंड दूर करने की
कोशिश करते रहे।