नोटबंदी ने शहनाई बजने वाले परिवारों में बेचैनी बढ़ा दी है। हालांकि अब उनके खाते से ढाई लाख मिलने का आदेश हो चुका है। अभी जिले में बैंक अफसरों के पास यह शुक्रवार तक ही पहुंच सकेगा। जेबें खाली होने से इन परिवारों के मुखिया मानसिक आघात के दौर से गुजर रहे हैं। किसी को दरवाजे आने वाली बारात की आवभगत की चिंता है तो किसी को बारात उठाने की।
फतेहपुर में अमौली थानाक्षेत्र के खूंटाझाल के राम किशोर वर्मा को बेटी मनीषा का तिलक 24 नवंबर को ले जाना है। इसके बाद 28 नवंबर को बारातियों और जनातियों की दरवाजे पर खातिरदारी करनी है। उनका कहना है कि ढाई लाख में भी क्या हो पाएगा? लिहाजा जैसे जैसे दिन नजदीक आते जा रहे हैं दिल की धड़कन तेज होती जा रही है।
बुढ़वा गांव की सीता देवी की बेटी प्रतीक्षा का विवाह 22 नंवबर को है। वह सप्ताह भर से लगातार बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की परिक्रमा कर रही है लेकिन नोट बदलने में सफल नहीं हो सकी है।
बैंक के हालात देखकर लोग रिश्तेदारों, पड़ोसियों और साहूकारों की शरण में जाने को मजबूर हैं। रिठवां के रहने वाले इंद्रपाल भी कम तनाव मेें नहीं। इनके बेटे नरेंद्र की बारात हालांकि तीन दिसंबर को है लेकिन जिस तरह से नोट को लेकर हाहाकार मचा है उससे यह भी परेशान हैं।