असोथर के सुसुवन बुजुर्ग गांव में मनरेगा से तालाब खुदाई करते मजदूर
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फतेहपुर संक्रमण काल में गांव की ओर लौटे परदेशी बाबुओं ने मनरेगा के काम पर फेरबदल कर दिया है। मजदूरों की राह देखने वाली मनरेगा में इतने कामगर जुट गए हैं, कि पिछले साल के आंकड़ों में कभी नहीं देखा गया। मई-जून की तपती गर्मी में औसतन पांच से आठ हजार लोग बमुश्किल काम करते थे। वहीं, फिलहाल साठ हजार के आंकड़े को पार कर गई है।
मनरेगा में मौजूदा समय में मिट्टी पुराई, नाली, बंधा बनाने और तालाब खुदाई करने और पौधरोपण का काम किया जा रहा है। मगर इसके कामगारों का जो मौजूदा स्वरूप है, पहले कभी नहीं रहा।
आंकड़ों की बात करें तो इस समय जनपद के समस्त तेरह विकास खंडों में चल रही योजनाओं में 62,476 श्रमिक काम कर रहे हैं। पिछले साल के आंकडे़ पर गौर करें तो यह आंकड़ा महज 15,411 था।
मनरेगा में यह चमक परदेशी कामगारों के आने के बाद ही आई है। क्योंकि, लॉकडाउन के पहले कभी इतने मजदूरों ने काम नहीं किया, जितना इन दो महीनों में काम किया है।