क्षेत्र के मंडवा गंाव में सांप्रदायिक बवाल के छह दिनों बाद जनजीवन पटरी पर आ रहा। बच्चे रास्तों और गलियों में खेलते नजर आने लगे हैं। चुनावी चर्चा भी शुरू हो गई है। किसान खेतीबाड़ी में लग गए हैं। गंाव से पलायन कर गई महिलाएं भी वापस आ रही हैं।
वहीं एतिहातन के तौर पर अभी भी पर्याप्त पुलिस बल मौजूद है। नवांगतुक सीओ अतुल चौबे ने गंाव जाकर हालात का जायजा लिया।
मंगलवार को पांच दिनों से घरों में कैद बच्चे रास्तों और गलियों में खेलते नजर आने लगे हैं। किसान खेतों में काम करने लगे हैं। चुनाव की चर्चा भी होने लगी है। गंाव के बन्ने, राजू, हारून और मुमताज ने बताया कि अचानक घटना घट गई। इसके बाद अब आपस में कोई भेदभाव नहीं रह गया है।
उधर फिर न कोई बवाल हो जाए। इसके लिए भारी फोर्स बल लगा हुआ है। अधिकारी कैंप कर रहे हैं। एसडीएम बलराम सिंह ने बताया कि हालात पूरी तरह से काबू में है। जनजीवन सामान्य हो गया है।
बता दें कि 22 अक्तूबर को गांव के अंदर से विसर्जन के लिए जा रही मूर्तियों को लेकर सांप्रदायिक बवाल हो गया था, जिसमें करीब एक दर्जन लोग घायल हो गए थे। चार घरों को जला दिया गया था। दो बाइक और एक ट्रैक्टर फूंक दिया गया था।
दूसरे दिन से बवाल और बढ़ गया। पुलिस बल पर भारी पथराव करने से पुलिस ने हवाई फायर और अश्रु गैस के गोले भी दागे थे, जिससे गांव और आसपास के मजरों में पूरी तरह से सन्नाटा पसर गया था। भय के कारण लोग पलायन करने लगे थे। पिछले दो दिनों से हालात सामान्य होने लगे हैं।