जरौली पंप कैनाल की मशीनों को सही करते मैकेनिक।
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फतेहपुर। लॉकडाउन में बंद पड़े जरौली पंप कैनाल की मशीनों को बदलने का काम फिर शुरू हो गया है। कार्यदायी संस्था ने पंप कैनाल से पुरानी मशीनों को हटाने का काम शुरू किया है। लघुडाल के अवर अभियंता विनय कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि तीस जून के बाद कैनाल के दो से तीन पंप चालू कराए जाएंगे। इसके बाद किसानों को सिंचाई का पानी मिलने लगेगा।
असोथर ब्लाक के जरौली गांव के पास यमुना नदी में 1990-91 वित्तीय वर्ष में लगाए गए पंप कैनाल के नवीनीकरण के लिए शासन से 14.60 करोड़ रुपये अवमुक्त हुए हैं। इससे आठ पंप, पाइप और मशीनें नई लगाई जाएंगी। साथ ही बिजली के पैनल बदले जाएंगे। सिंचाई विभाग की लघुडाल संस्था ने मशीनों को बदलने का काम मार्च महीने से शुरू किया था। लॉकडाउन से निर्माण कार्य पर रोक लग गई थी। किसानों की जरूरत को देखते हुए कार्यदायी संस्था ने पंप कैनाल की मशीनों को बदलने का काम शुरू करा दिया है।
तीस जून तक पंप कैनाल में स्विसवॉल (यह पानी को पंप हाउस में रोकता है) और बिजली के पैनल लगाए जाने हैं। इसके बाद कैनाल के पंप से जलापूर्ति बहाल हो सकेगी। 400 क्यूसेक क्षमता वाली इस पंप कैनाल से असोथर, विजयीपुर, धाता ब्लाक के अलावा कौशांबी जिले के किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलता है। आठ पंप में से सात पंप चलाए जाते हैं। एक पंप स्पेयर में रखा जाता है।
जरौली पंप कैनाल से 40 हजार एकड़ फसलों की सिंचाई होती है। जिले के करीब 15 हजार किसानों को सरकार की मुफ्त सिंचाई योजना का लाभ मिलता था। मौजूदा समय में पंप कैनाल की जर्जर मशीनों की वजह से विजयीपुर ब्लाक के किसानों को भी सिंचाई का पानी नहीं मिल रहा था। कैनाल की मशीनें समयावधि और चलने के घंटे पार कर चुकी हैं। किसानों की मांग पर तत्कालीन डीएम अंजनेय सिंह ने कैनाल के नवीनीकरण की डिमांड शासन को भेजी थी।
ठेकेदार ने पंप कैनाल में लगाई जाने वाली मशीनों को परिसर में पहुंचा दिया है। लॉकडाउन की वजह से काम बंद था। अब ठेकेदार ने फिर से काम शुरू करा दिया है। कैनाल में स्विसवॉल और बिजली के पैनल लगाने के बाद कुछ पंप चालू करा दिए जाएंगे। इससे कि किसानों को धान की रोपाई में दिक्कत न हो।
- वीके सिंह, सहायक अभियंता, लघुडाल