फतेहपुर। लॉकडाउन ने मेहतन मजदूरी करने वाले तबके को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। असल मायने में यही तबका सड़क पर पैदल चलकर अपने गांव की तरफ बढ़ रहा है। वाहन मिला तो ठीक, न मिला तो ठीक। तपती दोपहर में नंगे पैर कुछ दूर चला नहीं जाता लेकिन ऐसे भी झुंड दिखे जिनमें शामिल बच्चे और महिलाएं नंगे पैर थीं। सड़क पर पैर तप रहे थे लेकिन वह जीवटता से मंजिल की तरफ बढ़ते जा रहे थे।
कोरोना वायरस के बचाव की मार सबसे ज्यादा मेहतनत कश तबके पर पड़ रही है। इसकी नजीर राह चलते मिल रही है। बुधवार दोपहर एक बजे नऊवाबाग से भिटौरा बाईपास की तरफ मजदूर तबके का झुंड जा रहा था। यह विजयीपुर ब्लाक के लाखीपुर गांव का रहने वाला है। शिवबली, दीपक, वीरेंद्र और अजय के साथ इस झुंड में चार महिला और पांच बच्चे भी थे।
इनमें से दो बच्चों और एक महिला के पैर में चप्पल तक नहीं थी। वीरेंद्र ने बताया कि वह इटावा में ईट भट्ठे में मजदूरी करते थे। लॉकडाउन के बाद मालिक ने घर जाने को बोल दिया। वह किसी तरह से बचते-बचाते कभी पैदल, कभी ट्रक से यहां तक आ चुके हैं। अब 40 किलोमीटर का सफर पैदल ही तय होगा।
कलावती ने कहा कि चला नहीं जात है लेकिन कीन भी का जा सकत है। वर्मा तिराहे पर एक ऐसा भी झुंड मिला जो 25 मार्च को इंदौर से साधन न मिलने पर पैदल निकल पड़ा। इसमें शामिल राजू पांड्या ने बताया कि उन्हें गोरखपुर पहुंचना है। इतना सफर कट गया है तो बाकी का भी कट जाना है।