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जिले में लॉक डाउन, घरों में बंद हुए लोग

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फतेहपुर। कोरोना के खतरे से अवाम को बचाने के लिए 21 दिन के लॉकडाउन का जिले में काफी हद तक असर दिख रहा। लोगों ने सुबह के समय जरूरी खरीदारी की और पूरा दिन परिवार के साथ घर पर बिताया। बच्चों ने भी आपदा की इस घड़ी में बड़ों की बात मानते हुए अपने को इनडोर गेम, किताबों व कार्टून आदि में व्यस्त रखा। चौराहे-चौराहे पुलिसकर्मी, अस्पतालों में स्वास्थ्यकर्मी व मीडियाकर्मी ही बाहर नजर आए। हालांकि इन सबके बीच कुछ लापरवाह लोग भी सड़क पर बेवजह घूमते दिखे जिन्हें न अपने स्वास्थ्य की चिंता है और न अपने परिवार की। घनी आबादी वाली गलियों में भी समूह में लोग बैठे व खड़े दिखे। तय दूरी से खिलवाड़ कर यह भी संक्रमण को न्योता देते दिखे। पहला दिन होने के नाते पुलिस ने लोगों को समझाने पर ज्यादा वक्त दिया। एक अनुमान के मुताबिक करीब 25 करोड़ रुपये का शहरी बाजार का कारोबार ठप रहा। उघर, दुकान तक जनता के चलकर जाने की बजाय उसके पास तक सामान पहुंचाने के प्रशासनिक दावे पर पहले दिन अमल नही हो सका। एक रिपोर्ट।
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फतेहपुर। मंगलवार को रात साढ़े आठ बजे पीएम का संबोधन खत्म होते ही बाजारों में अचानक भीड़ बढ़ गई। मामला 21 दिन के लॉकडाउन का था, लिहाजा लोग जरूरी चीजें घर में स्टोर कर लेना चाह रहे थे। कोई दवा खरीद रहा था तो कोई सब्जी, दूध और पनीर। किराना स्टोर, मेडिकल स्टोर में ऐसी भीड़ पहुंची कि फासला रखने की बात बेमानी लगी। हर चीज के दाम बढ़े नजर आए। कुछ जगह 28 वाला फुल मलाई क्रीम दूध कई जगहों पर 35 रुपये की दर पर बिका। रसोई घर में सबसे अहम आटा की बोरियां रात में कई दुकानों पर खत्म हो गईं थीं। लिहाजा 25 रुपये किलो बिकने वाला खुला गेहूं का आटा 35 रुपये तक बिका। ब्रांडेड आटा के दाम 45 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए।
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