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संथारा पर फैसले से जैन अनुयायी आहत

Tue, 25 Aug 2015 12:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहपुर
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जैन समाज की संलेखना संथारा प्रथा पर राजस्थान हाईकोर्ट की हालिया टिप्पणी पर जैन अनुयायी आहत हैं। सोमवार को जैन समाज के अध्यक्ष आनंद कुमार जैन के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट में प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी पुष्पा सिंह को सौंपा। समाज के लोगों ने राजस्थान हाईकोर्ट से निर्णय पर पुनर्विचार करके जैन धर्म की अति प्राचीन प्रथा की रक्षा करने की अपील की है। उधर, सोमवार को अखिल भारतीय जैन समाज के आह्वान पर जिले के सभी प्रतिष्ठान बंद रहे हैं। नौकरी पेशा लोग भी ड्यूटी पर नहीं गए।
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जैन धर्म की अति प्राचीन प्रथा संलेखना/संथारा प्रथा को आत्महत्या परिभाषित करने पर नाराजगी जताई गई है। जैन समाज के अध्यक्ष आनंद कुमार जैन के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट में डीएम को ज्ञापन सौंपा। बताया कि जैन धर्म के अंतिम पड़ाव पर जैन साधुओं व त्यागी व्रतियों द्वारा प्राचीनकाल से संलेखना/संथारा द्वारा स्वेच्छा से जीवन त्याग कर मोक्ष मार्ग में पूर्ण समर्पित भाव से धर्म साधना तथा सर्वस्व त्याग का विधान चला आ रहा है। संलेखना/संथारा जैन धर्म के अंतर्गत अति उत्तम माना गया है। यह अति प्राचीन पूर्णत: धार्मिक होती है। अति प्राचीन जैन धर्म के संलेखना संथारा प्रथा को आत्महत्या परिभाषित किया जाना अनुचित है। अति प्राचीन प्रथा को आत्महत्या करार दिए जाने के फैसले के विरेाध में जैन धर्म द्वारा संपूर्ण विश्व सहित भारत में धर्म बचाओ आंदोलन मौन रूप से आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान सचिव नरेंद्र चंद्र जैन और कुलदीप जैन उर्फ जौन ने बताया कि अखिल भारतीय जैन समाज के निर्देश पर सभी प्रतिष्ठान बंद रहे हैं जो लोग नौकरी पेशा में थे वे लोग काम पर नहीं गए। इसके अलावा पूरे विश्व में मौन जुलूस के साथ ज्ञापन सौंपा गया। बताया कि अभी अखिल भारतीय जैन समाज की ओर से अगला कोई निर्देश नहीं प्राप्त हुआ है। पुन: आदेश मिलने पर फिर से कार्यक्रम किया जाएगा। इस मौके पर अजय जैन, सरला जैन, रीना, हर्ष, मेघा, देवेंद्र, संदीप, पूजा, माही, यशी, लक्ष्मी, कोमल, आकृति, प्रियंका, अनुज, निमित आदि जैन समुदाय के लोग रहे।
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