फतेहपुर। फास्ट फूड का स्वाद यदि आप ले रहे हैं, तो सतर्क हो जाएं। फास्टफूड पेट के लिए नुकसानदेह साबित हो रहे हैं। इसका प्रमाण जिला अस्पताल में प्रतिदिन आने वाले पेट के मरीजों से लगाया जा सकता है। इन मरीजों में युवाओं की संख्या अधिक है।
युवा समेत लोगों की पसंद फास्ट फूड बन गई है। फास्टफूड की दुकानों पर उपयोग होने वाले मैदा और बार-बार उपयोग होने वाले तेल के कारण लोगों की आंत पर असर पड़ रहा है। इसी वजह से जिला अस्पताल की ओपीडी में पेट के मरीजों की संख्या रोजाना बढ़ती जा रही है। इन मरीजों में 12 से 45 साल के लोग ज्यादा बीमार हो रहे हैं। अस्पताल आने वालों में ऐसे 25 से 30 फीसदी मरीज आते हैं। मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ. संतोष कुमार चौधरी ने बताया कि ओपीडी में हर दिन 12 से 16 साल के किशोर और 18 से 45 साल के युवा इलाज के लिए आ रहे हैं, जिन्हें पेट दर्द, पेट में जलन, गैस व उल्टी की परेशानी है।
बहुत से बच्चे स्कूल से लौटते वक्त दोपहर में बर्गर, चाउमीन, समोसा खाकर आते हैं। यह सब खाने से आंतों को नुकसान पहुंच रहा है। इसलिए मैदा और तेल में बार-बार प्रयोग की गई सामग्रियों को खाने से बचने की आवश्यकता है।
डॉ. संतोष ने बताया कि फास्टफूड सेंटरों में चाइनीज आइटम में मोनो सोडियम ग्लूटामेट का इस्तेमाल किया जाता है। यह एक फ्लेवर इंन्हैंसर है। यह स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है। इसमें काफी ज्यादा मात्रा में कैलोरी होती है और गर्मी लगना, पसीना आना, सीने में दर्द और कमजोरी जैसी दिक्कतें होती हैं। इसके अलावा बार-बार जलने वाले तेल से बनी सामग्रियां खाने से मोटापा और थायराइड की समस्या होती है। इसलिए बाहर का खाना स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है।