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सुहाना नहीं है मौसम... खराब हुई है शहर की आबोहवा जनाब

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आईटीआई रोड में कूड़े के ढेर में लगी आग। संवाद - फोटो : FATEHPUR
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फतेहपुर। इन दिनों शहर की स्थिति ज्यादा खराब है। सवा दो लाख की आबादी वाले शहर का एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) रविवार को 150 से 210 के बीच रहा। 19 नवंबर को यह 350 के आसपास दर्ज किया गया था, लेकिन 20 नवंबर को एक्यूआई घट कर 210 पहुंच गया था। इसके बाद से यह स्थिति बनी हुई है।
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दिवाली के बाद से खराब हुई शहर की हवा में धूल के कण काफी मात्रा में बढ़ गए हैं। आसमान में बादल, स्थिर हवा और बढ़े धूल के कणों के चलते पूरे दिन धुंध सी बनी रहती है। वायु गुणवत्ता खराब होने का प्रमुख कारण शहर में बड़े पैमाने पर वाहन, भवन निर्माण और शहर में घटते पेड़-पौधे प्रमुख रूप से शामिल हैं। प्रदूषण को रोकने
की दिशा में प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। हालत ये है कि शहर की आबादी और गाड़ियों की संख्या बढ़ती जा रही है। पेड़-पौधों की संख्या घटती जा रही है। जिम्मेदार, पर्यावरण संरक्षण की बात तो करते हैं, लेकिन अधिकांश इसके विपरीत ही काम करते हैं। इस समय शहर के किसी भी इलाके में एक-दो घंटे के लिए गाड़ी खड़ी कर दी जाए, तो उस पर धूल की परत दिखाई देने लगती है।
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101 से 150 तक (थोड़ा प्रदूषित) - फेफड़े की बीमारी जैसे अस्थमा व हृदय रोग। बच्चों और वयस्कों को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
151 से 250 तक (खराब)- लंबे समय तक ऐसे माहौल में रहने से लोगों को सांस लेने में तकलीफ और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को बहुत असुविधा हो सकती है।
251 से 350 तक (बहुत खराब)- लंबे समय तक ऐसे रहने पर लोगों को सांस की बीमारी हो सकती है। फेफड़े और दिल की बीमारियों को बहुत असुविधा हो सकती है।
351 से 450 तक (बहुत ज्यादा खराब) - यह आपातकाल की स्थित कही जाएगी। स्वस्थ लोगों का भी स्वसन तंत्र खराब हो सकता है। फेफड़े, हृदय रोग वाले लोग गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं।
प्रदूषण कम करने के लिए कूड़ा किसी भी कीमत पर न लगाएं, किसान खेेतों में पराली न जलाएं। जहां पर निर्माण कार्य हो, वहां पर पानी छिड़काव किया जाए। ताकि धूल के कण हवा व वाहनों के निकलने में न उड़ सकें। - सचिन कुमार शुक्ला, कृषि वैज्ञानिक केवीके थरियांव
एक्यूआई बढ़ने पर आंख में जलन, जुकाम, खांसी के मरीज बढ़ेंगे। लोग मास्क से नाक, मुंह ढककर निकलें। सांस के मरीज घर पर ही रहें। बहुत ही जरूरत पर घर से बाहर निकलें। - डॉ. आएम गुप्ता, वरिष्ठ फिजीशियन, जिला अस्पताल
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