फतेहपुर। दुर्घटनाओं में घायल व अचानक बीमार होने वाले मरीजों को इलाज देने वाला ट्रामा सेंटर महज एक इमारत बनकर रह गया है। जहां न तो समय पर मरीजों को इलाज मिल पा रहा है और न ही आवश्यक दवाएं। मरीज जरा सा गंभीर हुआ तो उसे तुरंत कानपुर रेफर कर दिया जाता है। सोमवार रात यहां आए घायल व बीमारों को इलाज नहीं मिला। दुर्घटना में आए घायल को टांके तक नहीं लग पाए। ट्रामा सेंटर में फैली अव्यवस्था और यहां के जिम्मेदार अफसरों की लापरवाही का आलम यह था कि आने वाले मरीजों को इलाज के नाम पर केवल रेफर की पर्ची थमा दी जाती है।
फतेहपुर शहर के रहने वाले भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष व्यापार प्रकोष्ठ पंकज त्रिपाठी व उनकी पत्नी अंजू त्रिपाठी जो बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की संयोजक हैं। दोनों अपने पुत्र प्रज्ज्वल त्रिपाठी के साथ सोमवार की रात उन्नाव से लौट रहे थे। दूधीकगार के पास उनकी चार पहिया गाड़ी पलट गई। इसमें प्रज्ज्वल त्रिपाठी का सिर फट गया। रात करीब एक बजे भाजपा नेता ट्रामा सेंटर पहुंचे, जहां उन्हें बताया गया कि सिर में टांके लगाने का इंतजाम नहीं है। उन्हें दूसरे अस्पताल जाना पड़ेगा। यह सुनकर भाजपा नेता स्तब्ध रह गए और वहां से चले गए।
फतेहपुर शहर के मसवानी मोहल्ला निवासी मोहम्मद शकील (23) सोमवार की रात करीब डेढ़ बजे ट्रामा सेंटर लाए गए। यहां मौजूद डॉक्टर को घरवालों ने बताया कि शकील अचानक बेहोश होकर गिर गए हैं और अब होश नहीं आ रहा हैं। डाक्टर ने तुरंत उन्हें रेफर कर दिया। न तो घरवालों को कारण पता चला और न ही कोई इलाज मिल सका।
खाड़ेपुर गांव की रहने वाली नीतू (35) को सोमवार की रात डेढ़ बजे अस्पताल लाया गया। वह हृदय रोग से पीड़ित थी। अचानक तबीयत खराब होने पर परिजन उन्हें लेकर पहुंचे, लेकिन यहां पर किसी प्रकार की दवा किए बगैर ही उन्हें कानपुर जाने को कहा गया। परिजन अस्पताल से रेफर कराकर नीतू को कानपुर ले गए।
ट्रामा सेंटर के हाल ये हैं कि यहां मरीजों को जो भी दवाएं दी जाती हैं, उसमें तो अधिकांश बाहर की होती हैं। ऐसा इसलिए भी है कि अस्पताल का दवा भंडार अच्छी दवाओं से खाली है। कुछ ही दवाएं अस्पताल में मिलती हैं।
ट्रामा सेंटर में सोमवार की रात इस तरह की अव्यवस्था हुई है, इसकी जानकारी नहीं है। वह इस मामले में सीएमएस से बातचीत करेंगे और पता करेंगे कि इलाज क्यों नहीं किया गया।
- डॉ. राजेंद्र सिंह, सीएमओ