फतेहपुर। मोहम्मद रजा की मां जमीला ने बताया कि सोमवार शाम को उसकी बेटे से मोबाइल फोन पर बात हुई थी। उसने बताया था कि सबकुछ ठीक है। नमाज पढ़ने के बाद खाना खाने जा रहा है। इसके कुछ देर बाद एटीएस की टीम पहुंची और रजा के दोनों हाथों में हथकड़ी लगा दी। जमीला के मुताबिक, उसके पकड़े जाने की बात उसके दूसरे बेटे जीशान ने गिरफ्तारी से कुछ देर बाद बताई थी। तब से वह परेशान दरवाजे पर बैठी बेटे की राह ताक रही है।
जमीला ने बताया कि रजा केरल में किसी कंपनी में काम करता है। साथ में उसका भाई जीशान और शहजाद भी रहते हैं। वह चार भाइयों में सबसे बड़ा है। एक बेटे की मौत हो चुकी है। जमीला के मुताबिक इधर कुछ दिनों से रजा कह रहा था कि बारिश होने के कारण काम ठीक नहीं चल रहा है। इसके बाद भी वह 15-20 दिनों में पांच से सात हजार रुपये भेजा करता था। वह कहां और क्या काम करता था, इसके बारे में उसे ज्यादा नहीं पता।
जमीला ने बताया कि रजा को ले जाने वाली पुलिस जीशान और शहजाद के मोबाइल फोन भी साथ ले गई है। जीशान ने किसी दूसरे के फोन से उससे बात की और रजा की गिरफ्तारी की जानकारी दी।
स्थानीय पुलिस ने मां से नहीं किया संपर्क
इतने गंभीर मामले में भी मंगलवार रात तक स्थानीय पुलिस ने रजा के परिवार व पड़ोसियों से संपर्क नहीं किया था। इसके पीछे एटीएस की कोई रणनीति हो सकती है। रजा की मां जमीला ने बताया कि सोमवार से लेकर अभी तक पुलिस नहीं आई है। बेटे को किस अपराध में पकड़ा गया है, यह भी पता नहीं चल रहा है। पुलिस अधिकारी भी मामले में चुप्पी साधे हैं। संकेत हैं कि पूरे मामले में लखनऊ से ही पुलिस महकमे के लिए कोई विशेष निर्देश जारी किए गए हैं।
रजा ने चार साल बाद ही छोड़ दी थी मदरसे की पढ़ाई
फतेहपुर। लखनऊ एसटीएफ की गिरफ्त में आने वाले अंदौली गांव के मो. रजा ने शुरुआती तालीम (कक्षा चार) गांव के मदरसे से ली की थी। इसके बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। करीब चार-पांच साल पहले केरल कमाने गया था। काम पर लगने के बाद अपने छोटे भाइयों को भी साथ बुला लिया। उसके पकड़े जाने की खबर गांव में फैल गई, लेकिन कोई भी उसके बारे में जुबां खोलने को तैयार नहीं दिखा।
अंदौली गांव में रहने वाली मां जमीला बानो के मुताबिक मो. रजा ने शुरूआती पढ़ाई गांव स्थित मदरसा इकरा गरीब नवाज से की थी। मदरसा यूपी बोर्ड से मान्यता प्राप्त है। वह करीब 15 साल की उम्र तक मदरसा जाता रहा। इसके बाद पढ़ाई छोड़ दी। परिवार के मुताबिक करीब चार साल से गांव नहीं आया है।
वह केरल में एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में वेल्डिंग का काम करता है। उसने अपने काम में ही छोटे भाई शहजाद और जीशान को भी लगाया था। तीनों भाई केरल में एक कंपनी में काम करते हैं। क्षेत्र में चर्चा है कि रजा डेढ़ साल पहले गांव आया था। कुछ दिन रहने के बाद चला गया था।
जांच का दायरा बढ़ाने को कभी भी आ सकती एटीएस
फतेहपुर। मोबाइल व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए टारगेट किलिंग की साजिश रचने वालों में कौन-कौन शामिल हैं, इसका एटीएस पता लगाने में जुटी है। रजा के मोबाइल ग्रुप में जिले के लोग भी शामिल हो सकते हैं। आरोप है कि रजा मोबाइल के जरिए जंग-ए-जिहाद के लिए मुजाहिद आर्मी तैयार कर रहा था।
एटीएस के हत्थे चढ़ने के बाद मो. रजा के बारे में गांव के लोग अंजान बन रहे हैं, लेकिन उनकी खामोशी बहुत कुछ कह रही है। आशंका है कि रजा ने अंदरखाने व्हाट्सएप ग्रुपों से नेटवर्क को खड़ा किया है। एटीएस रजा का हर कनेक्शन खंगालने में जुटी है। माना जा रहा है कि यूपी एटीएस एक-दो दिन में फतेहपुर के अंदौली आ सकती है। माना जा रहा है कि रजा के संपर्क में गांव के कई लड़के थे। वह लड़के भी उसकी आर्मी का हिस्सा हो सकते हैं। आशंका है कि मुजाहिद आर्मी के लिए फंडिग भी कई पाकिस्तानी संगठन कर रहे हैं। एटीएस की जांच में यहां से जुड़े मुजाहिद आर्मी के सदस्यों का खुलासा हो सकता है।