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बिना जांच रोजाना आधे मरीज लौट जाते

Fri, 04 Sep 2015 12:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहपुर
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सरकारी अस्पतालों में पहल सितंबर से हरेक वर्ग को अल्ट्रासाउंड जांच की मुफ्त सुविधा मुहैया कराने की घोषणा तो कर दी गई, लेकिन धरातल पर सीन कुछ और ही है। जिला सदर अस्पताल व जिला महिला अस्पताल में रोजाना करीब पचास मरीज अल्ट्रासाउंड के लिए आते हैं, इनमें 25 से तीस मरीजों को दूसरे दिन आने को कह दिया जाता है। वजह, पहले से तैनात रेडियोलॉजिस्ट हफ्ते में एक दो दिन ही आते हैं, जबकि हाल ही तैनात रेडियोलॉजिस्ट ने अब तक ज्वाइन ही नहीं किया है।
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सरकारी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड की मुफ्त सुविधा का लाभ अब तक बीपीएल परिवार के मरीजों व गर्भवती महिलाओं को ही मिल पा रहा था। शेष वर्ग के मरीजों को इस जांच के सौ रुपये शुल्क अदा करना पड़ रहा था। शासन स्तर से अब यह सुविधा हरेक वर्ग के लिए मुफ्त कर दी गई है। ऐसे में मुफ्त जांच के लिए सदर अस्पताल व जिला महिला अस्पताल के अल्ट्रासाउंड कक्ष के इर्द गिर्द भीड़ बढ़ने लगी है। जिसमें से कम से कम आधे जरूरतमंदों को दूसरे दिन आने को मजबूर होना पड़ रहा है। सदर अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग में दो ब्लैक एंड व्हाइट मशीन व एक कलर डाप्लर मशीन उपलब्ध है। फिलहाल अल्ट्रासाउंड कराने के लिए आधा सैकड़ा लोग आ रहे हैं। इसमें आधे मरीजों का ही रजिस्ट्रेशन कराया जाता है। वैसे तो अस्पताल के दोनों रेडियोलाजिस्ट के दो पद भर चुके हैं। इसके बावजूद किसी दिन एक रेडियोलाजिस्ट की सेवाएं मिल पा रही है तो किसी दिन यह भी नहीं मिलती हैं। हालात यह है कि पहले से तैनात रेडियोलॉजिस्ट डॉ. मनु गोपाल का महीने में एक-दो दिन ही आना होता है। नए रेडियोलॉजिस्ट डॉ. भगवती प्रसाद के न रहने पर अल्ट्रासाउंड सेवा पूरी तरह से ठप रहती है। नतीजतन तमाम जरूरतमंदों को दूसरे दिन आने को मजबूर होना पड़ता है। गुरुवार को रेडियोलॉजिस्ट की व्यस्तता के चलते मसवानी के याकूब बिना जांच कराए लौटने को मजबूर हो गईं।

इंसेट
सूचना का सच जान मायूस हुईं महिलाएं
जिला महिला अस्पताल में उपलब्ध अल्ट्रासाउंड सेवा सदर अस्पताल में रेडियोलाजिस्ट के ड्यूटी में न रहने यहां से आने वाले मरीजों को भी दी जाती है। इस अल्ट्रासाउंड मशीन से रोजाना तीन दर्जन के आसपास जांचें की जाती हैं। इस संख्या में गर्भवती महिलाओं का प्रतिशत 88 से 90 फीसदी तक रहता है। हालांकि गुरुवार को अल्ट्रासाउंड जांच कराने आई महिलाओं को निराशा हाथ लगी। अल्ट्रासाउंड कक्ष बंद देख कर कई अशिक्षित महिलाएं चस्पा सूचना न पढ़ पाने की वजह से दोपहर तक दरवाजा खुलने का इंतजार करती रहीं।   
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कोट
नए रेडियोलॉजिस्ट के आने से अल्ट्रासाउंड सुविधा में इजाफा होगा। रेडियोलॉजिस्ट की नदारदगी को लेकर शासन को अवगत कराया जा रहा है। एक बार फिर रेडियोलॉजिस्ट की सेवाओं की बाबत शासन से लिखापढ़ी की जाएगी।- डॉ. एके मिश्रा, सीएमएस, सदर अस्पताल।

कोट
अल्ट्रासाउंड सुुविधा हरेक वर्ग के लिए मुफ्त दी जा रही है। अब गर्भवती के अलावा कोई भी महिला भी बिना शुल्क दिए जांच करा सकती है। रेडियोलॉजिस्ट न होने से चिकित्सक से काम चलाना पड़ रहा है। - डॉ. रेखारानी, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल।
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