तिरहार में बारा घाट पर बना पीपे का पुल रविवार से चालू कर दिया गया। इस पुल का आवागमन 20 मई से बंद था। पुल बंद होने से लोगों को लंबा चक्कर काटना पड़ता था। संचालन होने से अब बेवजह की भागदौड़ पर विराम लग गया है। हालांकि अभी इस पुल से केवल चार पहिया वाहनों को ही गुजरने की इजाजत दी गई है।
जिले को बांदा की राह दिखाने वाला यह पुल आवागमन की दृष्टि से काफी मुफीद माना जाता है। दोनों जिलों के तमाम गांवों की जनता इसी पुल के जरिए आवाजाही करती है। बरसात के चलते पीडब्लूडी ने इसे 20 मई को बंद कर दिया था। अगर किसी को जाफरगंज से पैलानी जाना होता था उसे जोनिहा होते हुए सफर तय करना पड़ता था। चूंकि कस्बे से जोनिहा की दूरी 20 किलोमीटर है जबकि यहां बांदा जिले के पपरेंदा की दूरी 46 किलोमीटर। पपरेंदा से पैलानी की दूरी 15 किलोमीटर है। उधर, बारा घाट में बने पीपा के पुल से पैलानी का रास्ता 25 किलोमीटर का है।
वैसे तो मऊदेव से सीधे बांदा का रास्ता है जिसकी दूरी 58 किलोमीटर है लेकिन पांच महीने तक पुल टूटा रहने की वजह से यह रास्ता भी अनुपयोगी बना रहा। पीडब्लूडी ने बंद किए गए पीपे के पुल के संचालन की शनिवार की देरशाम तक कवायद की। जिसके बाद रविवार से पुल पर आवागमन शुरू हो गया। जिससे इलाकाई जनता ने राहत की सांस ली। हालांकि अभी इस पुल से सिर्फ छोटे वाहनों को ही निकलने दिया जाएगा। पुल के मेठ बजरंगी ने बताया कि अभी कुछ काम बचा है, दो दिन बाद बड़े वाहनों का आवागमन भी शुरू कर दिया जाएगा।