मौरंग के खनन से यमुना की कोख खोखली हो रही है। प्रतिबंध के बावजूद पट्टाधारक पोकलैंड व लिफ्टर जैसी मशीनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस मामले की शिकायत शासन व प्रशासन स्तर पर लगातार हो रही है। फिर भी प्रशासन अनदेखी कर रहा है। इससे अवैध तरीके से होने वाले इस खनन से बरसात में यमुना किनारे की आबादी पर नदी के कटाव की आफत टूट सकती है।
जिले की ओती खदान नंबर एक में न्यायालय की मनाही के बाद भी पोकलैंड व लिफ्टर मशीनें गरज रही हैं। जबकि केवल लोडिंग के लिए जेसीबी का प्रयोग हो सकता है। इन मशीनों से हो रहे खनन से यमुना का कटाव आबादी की ओर हो रहा है। जिस प्रकार से गैर कानूनी ढंग से हो रहे खनन को नजरदांज किया जा रहा है, उससे पट्टाधारक की मनमानी जारी है। अवैध खनन नदी के किनारे बसे गांवों के लोगों के लिए चिंता का सबब भी बनने लगा है।
इस मामले मेें यमुना पट्टी के ग्रामीणों ने अभी हाल ही में डीएम से मिलकर मशीन से होने वाले खनन पर रोक लगाए जाने की गुहार लगाई थी। इसके बावजूद न्यायिक आदेश की अवलेहना के खिलाफ प्रशासन स्तर पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हो सकी है। ऐसे में बरसात को सोच कर ग्रामीण हलाकान हो रहे हैं।
जिस प्रकार से कानून कायदों को धता बताते हुए यमुना नदी में 60 से 80 फुट तक पोकलैंड व लिफ्टर से मौरंग निकाली जा रही है, उससे इस नदी का जलस्तर प्रभावित हो रहा है। मत्स्य पट्टाधारक हीरालाल का कहना है कि मशीनों से होने वाले खनन से यमुना के अंदर पल बढ़ रहीं मछलियां भी मर रही हैं।