हमीरपुर। बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल का स्लैब गिरने से छह लोगों की मौत के दूसरे दिन भी अछपुरा और स्वासा खुर्द गांवों में शोक की लहर रही। हादसे में जान गंवाने वाले राजेश पाल और पुष्पेंद्र सिंह चौहान के घरों पर लोगों का तांता लगा रहा। दोनों परिवारों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति सामने आने के बाद हादसे का दर्द और गहरा हो गया है। एक परिवार में चार बेटियों के सिर से पिता का साया उठ गया। दूसरे में बूढ़े मां-बाप का सबसे बड़ा सहारा छिन गया।
अछपुरा निवासी राजेश पाल (45) पुल निर्माण कार्य में गार्ड थे और परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य थे। इनकी चार बेटियां हैं जिनमें बड़ी बेटी शिवानी स्नातक की पढ़ाई कर रही है। परिजन के अनुसार राजेश चाहते थे कि उनकी बेटियां पढ़-लिखकर आगे बढ़ें और पुलिस सेवा में जाएं। वह परिवार में बेटी की शादी के लिए भी धीरे-धीरे बचत कर रहे थे।
हादसे के बाद परिवार पूरी तरह बेसहारा हो गया है। एक बीघा जमीन से गुजारा संभव नहीं है। राजेश के पिता हृदय रोग से पीड़ित हैं। परिजन ने बताया कि अंतिम संस्कार के दौरान घर की दो भैंसें भी लापता हो गईं। इससे आर्थिक संकट और बढ़ गया है।
वहीं, स्वासा खुर्द निवासी पुष्पेंद्र सिंह चौहान की मौत से गांव में भी शोक है। तीन भाइयों में दूसरे नंबर के पुष्पेंद्र अविवाहित थे और माता-पिता के साथ रहते थे। छोटे भाई राघवेंद्र सिंह ने बताया कि हादसे से करीब एक घंटे पहले उनकी पुष्पेंद्र से फोन पर सामान्य बातचीत हुई थी लेकिन किसी को अंदेशा नहीं था कि यह आखिरी बात होगी।
परिजन के अनुसार पुष्पेंद्र 12 घंटे ड्यूटी करते थे और करीब नौ हजार रुपये मासिक कमाते थे। माता-पिता की देखभाल की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं पर थी। उनकी शादी की बातचीत भी लगभग तय हो चुकी थी और दिसंबर या फरवरी में विवाह की संभावना थी। वह नया घर बनाने और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का सपना देख रहे थे।
हादसे के बाद मां माया देवी और पिता राजेंद्र सिंह गहरे सदमे में हैं और बार-बार यही सवाल कर रहे हैं कि अब उनकी देखभाल कौन करेगा। परिवार के पास सीमित खेती है और मुख्य सहारा पुष्पेंद्र ही थे।
दोनों गांवों में ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की आर्थिक सहायता महत्वपूर्ण है लेकिन इससे लंबे समय की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। उन्होंने बच्चों की शिक्षा, बेटियों की शादी और वृद्ध माता-पिता के भरण-पोषण के लिए ठोस व्यवस्था की मांग की है।
आंखों के सामने सहकर्मियों को मलबे में दबते देखा
घटना के समय साइट पर मौजूद गार्ड अवधपाल ने दावा किया है कि आंधी के बावजूद निर्माण कार्य जारी था। उन्होंने बताया कि उनकी आंखों के सामने ही सहकर्मी मलबे में दब गए। अवधपाल ने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
श्रम विभाग ने जारी किया नोटिस
श्रम विभाग के प्रवर्तन अधिकारी महेंद्र कुमार ने बताया कि निर्माण कंपनी को वर्कमैन कंपनसेशन एक्ट के तहत नोटिस जारी किया गया है। मृतकों की आयु के अनुसार नियमानुसार मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही विभागीय सहायता उपलब्ध कराने की कार्रवाई भी की जा रही है।
पटरी पर कैसे लौटेगी जिंदगी
अछपुरा में राजेश पाल की बेटियों के भविष्य को लेकर चिंता गहराई हुई है। स्वासा खुर्द में पुष्पेंद्र सिंह चौहान की अधूरी रह गई शादी और माता-पिता की स्थिति चर्चा का विषय बनी हुई है। दोनों गांवों में एक ही सवाल उठ रहा है कि जिन परिवारों ने अपने सहारे खो दिए हैं उनकी जिंदगी अब कैसे पटरी पर लौटेगी।
फोटो 30 एचएएमपी 34- स्वासा खुर्द गांव में मृतक पुष्पेंद्र के घर पहुंचकर परिजनों से जानकारी लेते