फतेहपुर। यमुना कटान से भूमिहीन हुए किसानों को जमीन वापस दिलाने के लिए प्रशासन ने पहल शुरू कर दी है। इसके लिए यमुना का सीमांकन किया जाएगा।
फतेहपुर और बांदा राजस्व विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों की टीम बनाई गई है, जो नदी के दोनों ओर पैमाइश करके रिपोर्ट तैयार करेगी। सीमांकन के बाद कटान में गई जमीन किसानों को मिल सकेगी।
ललौली के पास यमुना में केन का विलय होता है। जिस कारण से केन के पानी के दबाव से बहाव तेज होता है और फतेहपुर सीमा की तरफ कटान होता है।
जिले का सबसे ज्यादा हिस्सा यमुना कटान में कोर्रा कनक ग्राम पंचायत का प्रभावित हुआ है। सन 1978 से करीब 13 हजार बीघा जमीन यमुना में समां गई है। इसमें करीब 400 किसान भूमिहीन हो चुुके हैं।
जिनके पास कभी 200-400 बीघा जमीन हुआ करती थी। आज उन्हें अपने परिवार का पेट भरने के लिए गेहूं, चावल, दाल खरीदनी पड़ती है। कटान की समस्या और किसानों के मुद्दे को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया।
अब प्रशासन भी किसानों की समस्याओं को संज्ञान लिया। बांदा और फतेेहपुर के राजस्व कर्मियों और अधिकारियों की टीम बनाई गई है। जो दोनों ओर पैमाइश करके यमुना का सीमांकन करेंगी। सीमांकन से कटान में गई जमीन का भी पता लग जाएगा और जिन किसानों की जमीन होगी, उनको मिल जाएगी।
यमुना कटान में दो जिले के सीमा का मामला है। दोनों जिले की तरफ यमुना की पैमाइश कराई जाएगी। तब कटान से प्रभावित हुए किसानों की समस्या का हल निकलेगा। इसके लिए दोनों जिले के एसडीएम के नेतृत्व में टीम गठित की गई है। - अपूर्वा दुबे, जिलाधिकारी।