फतेहपुर। कोरोना काल में अनाथ हुए बच्चों की पढ़ाई में मदद करने का ऐलान करने वाली सरकार शायद कोरोना काल के बाद बच्चों को भूल गई है।
योजना के शुरुआती दौर में बड़े-बड़े मंचों से ऐलान तो खूब हुए लेकिन जब खर्च सामने आया तो बजट खत्म हो गया। अब बच्चे और विभाग दोनों ही बजट की राह ताक रहे हैं।
मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के सरकारी ऐलान के मुताबिक कोरोना काल में संक्रमित दंपती की मौत के बाद अनाथ हुए बच्चों की पढ़ाई के लिए चार हजार रुपये मासिक और सामान्य मौत में अपने माता-पिता गवां देने वाले बच्चों की पढ़ाई के लिए 2500 रुपये प्रतिमाह दिया जाना था।
सरकारी घोषणा ने सुर्खियां तो खूब बटोरीं लेकिन बजट के अभाव में योजना परवान नहीं चढ़ सकी। योजना संचालन की जिम्मेदारी प्रोबेशन विभाग को दी गई है। विभागीय आंकड़ों की मानें तो अब तक कोरोना से हुई मौतों में अनाथ हुए बच्चों की संख्या 51 है।
जिनमें से महज 35 बच्चों को ही योजना से लाभांवित किया जा सका है। शेष 16 बच्चों के लिए बजट उपलब्ध नहीं है। इसी क्रम में दूसरी श्रेणी में सामान्य मौतें के कारण अनाथ हुए 44 बच्चों में से अभी तक एक भी बच्चे को योजना का लाभ नहीं मिला है।
विधानसभा क्षेत्र - कोविड से मौत होने पर अनाथ होने वाले बच्चे - सामान्य मौतों में अनाथ हुए बच्चे
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हुसैनगंज - 5 - 3
फतेहपुर - 21 - 29
बिंदकी - 5 - 6
खागा - 10 - 4
जहानाबाद - 4 - 0
अयाह शाह - 6 - 2
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कुल - 51 - 44
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मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना कोविड के तहत जिन बच्चों के लिए बजट आया था, वह उन बच्चों तक पहुंच गया है। शेष बच्चों के लिए बजट आने का इंतजार है। सामान्य श्रेणी वाले में अभी तक बजट न मिलने से लाभ नहीं दिया जा सका है। बजट मिलते ही सभी बच्चों को सुविधाएं मिलना शुरू हो जाएंगी। - नीरज कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी