खागा क्रय केंद्र में धान का नमूना लेते केंद्र सरकार की टीम के ईटी पीके सिंह। संवाद
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फतेहपुर। वाटर से खराब होने के कारण मिल मालिकों का सात ट्रक चावल लेने से मना करने के मामले का एफसीआई के आलाधिकारियों ने संज्ञान लिया है।
सोमवार को दिल्ली से एफसीआई के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर आए और जिले के अफसरों के साथ क्रय केंद्र और राइस मिलों में जाकर धान और चावल की गुणवत्ता देखी। धान के नमूने जांच के लिए ले गए हैं। अगर जांच में चावल में वाटर डैमेज मिलता है, तो यूआरएस (अंडर रिलेक्सेशन स्कीम) के तहत चावल के मानक में छूट मिल सकती है।
एफसीआई के मानक से अधिक पानी से खराब होने के कारण राइस मिल मालिकों का सात ट्रक चावल लेने से एफसीआई ने मना कर दिया था। इस पर मिल मालिकों ने क्रय केंद्र में धान खरीदे गए धान की कुटाई करने से मना कर दिया था।
इस खबर को अमर उजाला ने रविवार के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसे अधिकारियों ने संज्ञान लिया और एफसीआई दिल्ली को रिपोर्ट भेजी। तब एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर (ईडी) पीके सिंह ने टीम के साथ धान की गुणवत्ता देखने के लिए आए।
वह अपने साथ धान का नमूना ले गए हैं। दिल्ली एफसीआई में धान से चावल निकाल कर गुणवत्ता देखी जाएगी। अगर चावल में वाटर डैमेज आता है, तो यूआरएस स्कीम के तहत वाटर डैमेज में चार से पांच फीसदी की छूट मिल सकती है।
जबकि इस समय चावल में वाटर डैमेज तीन फीसदी ही मान्य है। इस दौरान क्षेत्राधिकारी खाद्य विपणन भीम सिंह, एफसीआई के जिला प्रभारी अनूप कुशवाहा रहे।