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एक्सायरी दवा खाने के बाद किसान की मौत

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ज्ञानसिंह के दरवाजे में जामा लोग। संवाद - फोटो : FATEHPUR
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खागा (फतेहपुर)। बुखार से पीड़ित एक किसान की एक्सापर दवा खाने के बाद मौत हो गई। उसे गुरुवार को नाजुक हालत में एसआरएन प्रयागराज में भर्ती कराया गया था।
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परिजन शुक्रवार की सुबह शव ट्रैक्टर पर लेकर अस्पताल पहुंचे और हंगामा किया। हालांकि तब तक वहां के कर्मचारी भाग चुके थे। पुलिस ने मृतक के बेटे की सूचना पर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
किसान को जिस अस्पताल से दवा मिली, वह खागा जीटी रोड पर है और गैर पंजीकृत हैं। इसके संचालक प्रतापगढ़ जनपद के पुरुष जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक हैं।
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खागा कोतवाली के नक्सारा गांव निवासी ज्ञान सिंह (65) घर में पत्नी, बेटे अमन (17), बेटी नेहा (18), छाया (20) व माया के साथ रहते थे।
सात नवंबर को ज्ञान सिंह को बुखार आया तो पुत्र अमन उन्हें लेकर खागा जीटी रोड नहर के पास स्थित एक गैर पंजीकृत अस्पताल में पहुंचा। अमन ने बताया कि यहां पर डॉक्टर सुरेश सिंह ने पिता के खून की जांच कराई और इसके बाद दवा दी।
राहत नहीं मिलने पर नौ नवंबर की दोपहर करीब दो बजे पिता को लेकर वह दोबारा डॉ. सुरेश के पास पहुंचा। इस पर चिकित्सक ने उन्हें दोबारा दवा दी।
बेटे अमन के मुताबिक, गुरुवार दोपहर पिता ने जैसे ही एक दवा खाई, तो उन्हें उलझन होने लगी। वह लोग तुरंत गाड़ी से उन्हें प्रयागराज स्थित एसआरएन अस्पताल लेकर गए। जहां रात करीब 10 बजे उन्होंने दम तोड़ दिया।
परिजन रात में ही शव लेकर आ गए और शुक्रवार की सुबह डॉ. सुरेश के अस्पताल पहुंचे और हंगामा किया। हालांकि यहां काम करने वाले कर्मचारी पहले से ही भाग चुके थे।
परिजन इसके बाद कोतवाली पहुंचे और शिकायत की। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। ज्ञान सिंह के पुत्र अमन ने आरोप लगाया कि पिता की मौत एक्सपायरी दवा खाने से हुई है, जो डॉ. सुरेश सिंह के अस्पताल से उन्हें दी थी।
वर्षों से चल रहा है गैर पंजीकृत अस्पताल
खागा जीटी रोड पर डॉ. सुरेश सिंह का यह अस्पताल कई वर्ष पुराना है और आज तक इस अस्पताल का नामकरण तक नहीं हुआ। जाहिर है कि विभाग में उच्च पद पर होने के कारण डॉ. सुरेश सिंह ने इसकी जरूरत नहीं समझी और बिना किसी पंजीकरण के गैर प्रशिक्षित स्टाफ के साथ वह लोगों का इलाज करते रहे। खागा कस्बे के लिए डॉ. सुरेश काफी चर्चित चिकित्सक हैं। सीएचसी हरदो के प्रभारी और व जिला स्तरीय नोडल अधिकारी, जिनके कंधों पर ऐसे अस्पतालों की धरपकड़ की जिम्मेदारी होती है। वह कभी डॉ. सुरेश के अस्पताल की दहलीज नहीं नहीं चढ़े।
डॉ. सुरेश ने कहा, घटना जांच का विषय
इस प्रकरण में जब डॉ. सुरेश से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वह सप्ताह में एक बार वहां आते हैं और मरीज देखते हैं। कर्मचारी केवल देखरेख में रहते हैं। ज्ञान सिंह ने जो दवा खाई वह कहां से आई, यहां जांच का विषय है। वह एसआरएन में भर्ती हुए थे। गलती कहां हुई, इसे लेकर बातचीत करेंगे।
10 नवंबर को अस्पताल से थे गैर हाजिर
दिवंगत किसान ज्ञान सिंह के पुत्र अमन ने बताया कि उसने सात और नौ नवंबर को डॉ. सुरेश से पिता का इलाज कराया था। सात को रविवार पड़ता है और नौ को मंगलवार। इस मामले की जब पड़ताल की गई तो पता चला कि डॉ. सुरेश 10 नवंबर को जिला अस्पताल प्रतापगढ़ में नहीं थे, जबकि नौ नवंबर को वह प्रतापगढ़ में थे।
रात को पहुंचे थे अस्पताल तो छीन ली दवाएं
अमन सिंह ने बताया कि रात में जब वह शव लेकर प्रयागराज से लौटे तो उन्होंने एक्सपायर दवा को लेकर अस्पताल में रहने वाले युवकों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने पूरी दवाएं छीन लीं। एक दवा जो पिता ज्ञान सिंह ने खाई थी, वह उनके पास बच गई।
डॉ. सुरेश का खागा में कोई अस्पताल है, इसकी जानकारी नहीं है। नौ नवंबर को वह प्रतापगढ़ अस्पताल में थे या नहीं, यह बातचीत करने के बाद पता चलेगा। वह 10 नवंबर को अस्पताल में नहीं थे। वह इस मामले की जांच कराएंगे। - डॉ. आर्य देश दीपक, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज प्रतापगढ़।
सोशल मीडिया के जरिये जानकारी हुई है। लिखित शिकायत अभी तक प्राप्त नहीं हुई है। कोई शिकायत करता है तो जनपद के नोडल अधिकारी को सूचना देकर कार्यवाही की जाएगी। समय-समय पर गैर पंजीकृत अस्पतालों के खिलाफ छापेमारी होती है।- डॉ. राजीव जायसवाल, सीएचसी प्रभारी हरदो।

श्रानसिंह की फाइल फोटो। संवाद- फोटो : FATEHPUR

इसी इमारत में चलता है प्रतापगढ़ के जिला अस्पताल अधीक्षक का अवैध अस्पताल। संवाद- फोटो : FATEHPUR

कोतवाली गेट पर लगी भीड़। संवाद- फोटो : FATEHPUR

इसी दवा को खाने के बाद बिगड़ी थी तबियत। संवाद- फोटो : FATEHPUR

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