खागा। कूरा गांव में हुए योगमाया हत्याकांड में पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पुलिस नए सिरे से जांच कर रही है। पोस्टमार्टम में जहां गले पर शार्प इंजरी मिली है।
वहीं, डॉक्टर ने योगमाया का बिसरा सुरक्षित कर लिया। ऐसा तब होता है, जब मरने को वाले को कोई दवा दी गई हो। योगमाया को मारने से पहले शाम को खाने में बेहोशी की दवा या जहर देने की आशंका जताई जा रही है।
गुलरिहनपर मजरे कूरा गांव की रहने वाली योगमाया पत्नी इंद्रमोहन लोधी की हत्या उसके कमरे में सो रही नेहा वर्मा निवासी वार्ड नंबर नौ सुभाष नगर, जिला महराजगंज ने हंसिया से गला काटकर 25 दिसंबर की रात हत्या कर दी थी।
इस मामले में योगमाया के भाई सत्यप्रकाश ने नेहा वर्मा व अपने बहनोई इंद्रमोहन लोधी के खिलाफ दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस की जांच में यह साफ है कि इंद्रमोहन और नेहा वर्मा के बीच प्रेम-प्रसंग था।
इसका विरोध योगमाया कर रही थी। शनिवार की रात योगमाया, नेहा व योगमाया का डेढ़ वर्षीय पुत्र अमन कमरे में सो रहे थे। रात करीब साढे़ दस बजे नेहा ने योगमाया की गला काटकर हत्या कर दी थी। सोमवार को पुलिस ने इंद्रमोहन व नेहा को जेल भेज दिया।
पुलिस ने योगमाया की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अध्ययन किया तो उसमें गले पर शार्प इंजरी (धारदार हथियार से चोट) पाई गई। इसके साथ ही योगमाया का बिसरा सुरक्षित किया गया है, जिसे पुलिस विधि-विज्ञान प्रयोगशाला भेजेगी।
इंस्पेक्टर खागा आनंद प्रकाश शुक्ल ने बताया कि गले पर वार से मौत हुई है, लेकिन उसका बिसरा भी जांच के लिए गया है। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों को ऐसी आशंका होगी कि हत्या से पहले उसे बेहोश करने के लिए दवा या जहर दिया गया होगा। जांच रिपोर्ट के बाद कारण स्पष्ट होगा।
जेल जाने से पहले कबूल की घटना
योगमाया की हत्या में रंगे हाथ पकड़े जाने के बाद भी नेहा ने पुलिस के सामने अपना जुर्म कबूल नहीं किया। उसे खुदकुशी बताकर पल्ला झाड़ती रही।
जबकि उसके गले पर नाखून के निशान, दोनों हाथ पर हंसिया से बने जख्म, खून से सने कपड़े, कमरे में उसके अलावा किसी का नहीं होना उसे आरोपी बना रहे थे।
सूत्रों के मुताबिक जेल जाते समय नेहा ने अपना जुर्म कबूल किया। उसने कहा कि योगमाया, उसके व इंद्रमोहन के बीच अड़ंगा बन रही थी। उसके रहते हुए वह इंद्रमोहन को नहीं पा सकती थी। इतना ही नहीं उसने कहा कि इंद्रमोहन जब फिल्म संबंधी काम करते थे तो पत्नी उन्हें डिस्टर्ब करती थी।
जेल की कोठरी कराएगी असली पश्चाताप
लेखक इंद्रमोहन व भोजपुरी अभिनेत्री नेहा का फिल्मी सफर पश्चाताप फिल्म के साथ शुरू हुआ था और अब दोनों जेल में हैं। पश्चाताप फिल्म तो नहीं रिलीज हुई लेकिन जेल की कोठरी में बीतने वाला हर पल, दोनों परिवारों की पीड़ा, उन्हें जरूर पश्चाताप का असली मतलब बताएगी।
घटना का वादी बनने की तैयारी में था इंद्रमोहन
पत्नी योगमाया की हत्या में शामिल इंद्रमोहन का प्लान बहुत ही जबरदस्त था। उसने खुद को घटना से दूर रखने के लिए सुबह से ही नाटक किया और सुसरालियों की नजर में अंतिम समय तक बना रहा।
इतना ही नहीं 25 दिसंबर की रात तीन बजे वह खुद कोतवाली आया और बताया कि पत्नी ने खुदकुशी कर ली है। पुलिस ने पत्नी की उम्र पूछी। बातचीत में शंका हुई तो पुलिस ने उसे रोक लिया और तुरंत मौके पर पहुंची।
वहां माजरा कुछ और निकला। पुलिस का मानना है कि इंद्रमोहन इस मामले में मुकदमे का वादी बनने की तैयारी में था। वह नेहा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराता और कुछ साल में पैरवी बंद कर देता।
इससे मुकदमा कमजोर पड़ता और नेहा बाहर आ जाती। मगर, योगमाया के भाई सत्यप्रकाश ने दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया और उनकी योजना असफल कर दी।