फतेहपुर। जिला महिला अस्पताल में 26 फरवरी से शुरू हुई एसएनसीयू में ताला लटक गया है। चालू होने के 27 दिन बाद ही यूनिट की इस हालत के पीछे स्टाफ की कमी बताई जा रही है। अब सवाल उठ रहे हैं कि जब स्टाफ और पूरे संसाधन नहीं थे तो आनन फानन में इसका उद्घाटन प्रभारी मंत्री राम नरेश अग्निहोत्री से कराया ही क्यों गया।
स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) और मदर एंड न्यूनेटल यूनिट (एनएनसीयू) की गुरुवार दोपहर करीब साढ़े बारह बजे अमर उजाला की टीम ने जब पड़ताल की तो एसएनसीयू में ताला लटका मिला। एक बच्चा मदर केयर यूनिट में रखा गया था। एसएनसीयू की यह हालत स्टाफ की कमी के कारण बनी हुई है।
सीएमओ के अधीन स्टाफ जरूर रखा गया है लेकिन इसकी उपयोगिता इस खास यूनिट में अभी तक देखने को नहीं मिली है। इस यूनिट की स्थापना गंभीर अवस्था में पहुंचने वाले नवजात बच्चों को जीवन देने के लिए की गई। वैसे तो जिला महिला अस्पताल की पहली मंजिल पर अधिकारिक तौर पर एसएनसीयू ने काम करना शुरू कर दिया है लेकिन इसका फायदा जरूरतमंद बच्चों को नहीं मिल पा रहा है।
एसएनसीयू पर 12 वार्मर की सुविधा है, जबकि एमएनसीयू के लिए 12 बेड उपलब्ध हैं। एक वेंटिलेटर की सुविधा दी गई है लेकिन इसे चलाने को टेक्नीशियन की तैनाती नहीं की का सकी है। एक्सपर्ट ना होने की दशा में जीवन देने वाला यह सिस्टम बेमकसद बना हुआ है।
इस यूनिट के संचालन के लिए तीन बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों की आवश्यकता है। दो विशेषज्ञ की तैनाती हो चुकी है। एक चिकित्सक को मार्च महीने में नियुक्त किए जाने की बात कहीं गई थी। अभी तक उनकी तैनाती नहीं हो सकी है।