अमौली। नोनारा के अमर शहीद स्मृति एवं श्रद्धांजलि समारोह में शुक्रवार देश भक्ति का जज्बा देखते बना। भक्तिगीतों के बीच शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। नोनारा कांड को इतिहास का अमिट अध्याय बताते हुए देश हित में काम करने का संकल्प लिया गया। कारागार राज्यमंत्री जय कुमार सिंह जैकी ने नोनारा में पार्क बनवाने और इसमें शहीदों की प्रतिमाएं लगवाने की घोषणा की।
कार्यक्रम में राज्यमंत्री ने अमर शहीदों को याद किया। कहा कि आज हम आजाद हैं तो शहीदों की बदौलत। उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने नोनारा में बड़ा पार्क तैयार कराने की घोषणा की। कहा कि तहसीलदार को जमीन खोजने का जिम्मा सौंपा है। पार्क में शहीदों की प्रतिमाएं लगवाई जाएंगी। बहुत जल्द नोनारा-बुढ़वा मार्ग का निर्माण शुरू होगा।
पीडब्ल्यूडी के पास बजट आ चुका है। तहसीलदार गणेश सिंह, बीडीओ कमल किशोर कमल, पूर्व विधायक मदन गोपाल वर्मा, सुशीला सिंह, जयंती वर्मा, लोकनाथ पांडेय, विशंभर तिवारी, हिमांशु अवस्थी और प्रताप नारायन मिश्र ने श्रद्धांजलि दी। राज्यमंत्री ने स्व. धनीराम की पुस्तक बलिदान भूमि का विमोचन किया। शहीदों के परिजनों और हाईस्कूल, इंटरमीडिएट के मेधावियों को सम्मानित भी किया।
नोनारा प्रदेश का सर्वाधिक स्वतंत्रता सेनानी वाला गांव कहा जाता है। 26 फरवरी 1931 की शाम करीब चार बजे तहसील खजुहा के तत्कालीन तहसीलदार लगान वसूली के लिए नोनारा आए थे। लोगों को बुलाकर लगान अदा करने का हुक्म दिया। उस समय महात्मा गांधी ने फतेहपुर आकर लगान बंदी आंदोलन चलाया था। जिसे नोनारा की जनता ने भरपूर सहयोग व समर्थन दिया था।
ऐसे में एक स्वर में लगान अदा करने से मना करने पर तहसीलदार ने छोटे लाल, भवानीदीन, बद्री दादा व महादेव मिश्रा को बांधकर उन पर चाबुकों की बौछार करके अधमरा कर दिया। गांव के तत्कालीन मुखिया शिव नारायण तिवारी इसकी सूचना पाकर अपने बड़े बेटे दुलारे के साथ तहसीलदार के पास गए। तहसीलदार के न मानने पर मुखिया के बेटे दुलारे ने उसकी पिटाई कर दी। तब अंगरक्षक ने गोली चला दी जो मुखिया को लगी। उनकी मौके पर मौत हो गई। दूसरी गोली बद्री दादा के पैर में लगी। इसके बाद दहशत फैल गई। तहसीलदार ने भागना चाहा लेकिन गुस्साएं लोगों ने घेरकर उसे मार डाला था।