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खेत को नहीं मिल रहा पानी, सूख रही धान की नर्सरी

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बिजली न आने से धान की रोपाई वाला सूखा खेत - फोटो : FATEHPUR
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फतेहपुर। जिलेभर में बेपटरी हुई बिजली व्यवस्था किसानों पर भारी पड़ रही है। अघोषित कटौती और लो-वोल्टेज के चलते शहरी क्षेत्र में छह से आठ घंटे और ग्रामीण में 18 से 20 घंटे कटौती की जा रही है। असोथर उपकेंद्र से जुड़े कोर्रा सादात गांव में बिजली न आने से खेत के बाहर खोदकर डाली गई धान की नर्सरी सूख रही है। इससे 300 रुपये किलो की दर से बीज खरीदने वाले किसानों की चिंता बढ़ गई है।
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करीब 15 दिन से जिले की बिजली व्यवस्था बेपटरी है। उमस और गर्मी के बढ़ने से वोल्टेज की समस्या भी गहरा गई है। शहरी क्षेत्र में 24 घंटे बिजली देने का रोस्टर कागजों तक सीमित रह गया है है। रात और दिन में अघोषित कटौती के साथ उपकेंद्र की मशीनें बार-बार ट्रिप होने से दिक्कत आ रही है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र के उपकेंद्रों से होने वाली आपूर्ति तो पूरी तरह से चरमरा गई है।
यहां लोगों को 24 घंटे में चार से छह घंटे बिजली मिलती है। उसमें भी लो वोल्टेज की समस्या है। ट्यूबवेल चलाने को जरूरी 440 वोल्टेज के बदले मात्र 150 से 200 वोल्टेज का करंट रहता है। इससे ट्यूबवेल नहीं चल पाते हैं। धान की रोपाई के लिए पानी की जरूरत है। इस समय न तो तेज बारिश हो रही है और न ही सही ढंग से बिजली मिल रही है। इससे रोपने के लिए रखी गई नर्सरी सूख रही है। इससे किसान परेशान हैं।
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जिले में करीब 30 हजार ट्यूबवेल हैं। बारिश न होने से किसान ट्यूबवेल की बटन को ऑटो में लगाए रहते हैं। इससे बिजली आपूर्ति होने के एक मिनट में सभी ट्यूबवेेल चालू हो जाते हैं। इससे लोड बढ़ गया है। जिले में कृषि की अलग से लाइन भी नहीं बनी है। इससे हाईटेंशन लाइन में लोड बढ़ते ही फाल्ट शुरू हो जाते हैं और आपूर्ति बाधित होती है। बारिश होने के बाद ही लोड कम होगा और बिजली सप्लाई पटरी पर आएगी। - आनंद प्रकाश शुक्ला, अधीक्षण अभियंता, विद्युत वितरण खंड
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