आढ़त की दुकान पर रखी बोरियो में भरी भिंडी
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खागा। भिंडी, करैला नवीन मंडी स्थल में थोक भाव में सौ रुपये से लेकर दो सौ रुपये क्विंटल बिक रहा है। बिक्री न होने पर फेंक दिया जाता है। इन सब्जियों की लागत निकलना तो दूर, तोड़ने और मंडी तक लाने का किराया भी नहीं मिल रहा है।
किसान मान सिंह, ज्ञान सिंह, धरम राज और लल्लू महाजन ने बताया कि लॉकडाउन से सब्जियां प्रयागराज, कानपुर सहित अन्य जिलों में नहीं जा पा रहीं हैं। क्षेत्र की अन्य कस्बों और गांवों में लगने वाली बाजार भी बंद है।
इन बाजारों में फुटकर विक्रेता नहीं आ रहे हैं। माल की खपत नहीं के बराबर है। इन किसानों ने बताया कि मंडी में लाई गई आधी ही सब्जियां बिक पाती हैं। आढ़तियों के यहां छोड़ जाते हैं। दूसरे दिन भी न बिकने पर फेंक दी जाती हैं। हजारों रुपये का नुकसान हो चुका है। अब तो हालत यह हो गई है कि खेतों में ही इन सब्जियों को सड़ा देना पड़ेगा।