फतेहपुर में जिले के 3275 नि:शक्त बच्चों को अनिवार्य शिक्षा अधिनियम का लाभ नहीं मिल रहा है। विशेष शिक्षकों की कमी का खामियाजा नि:शक्त बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। फिलहाल बेसिक शिक्षा विभाग के पास 700 नि:शक्त बच्चों को पढ़ाने के लिए 35 शिक्षक हैं, जबकि जिले में छह से 14 वर्ष बीच के 3975 नि:शक्त बच्चे हैं जो विद्यालयों में पंजीकृत हैं। बाकियों की पढ़ाई भगवान भरोसे चल रही है।
बेसिक शिक्षा विभाग के अभिलेखों में जिलेभर में छह से 14 वर्ष के बच्चों की संख्या 3975 है। यह संख्या जुलाई के बाद हुए सर्वे रिपोर्ट में अंकित है। अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के तहत इन बच्चों को भी पढ़ाई की व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन शिक्षकों की कमी के कारण नि:शक्त बच्चों के पढ़ने की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। जिले में नि:शक्त बच्चों को पढ़ाने वाले 35 विशेष शिक्षकों की नियुक्ति है।
एक शिक्षक को अधिकतम 20 नि:शक्त बच्चे या फिर चार स्कूलों में नि:शक्त बच्चों को पढ़ाने का मानक है। ऐसे में सभी शिक्षक मिलाकर कुल 700 बच्चों को ही पढ़ा पा रहे हैं। शेष 3275 नि:शक्त बच्चे पढ़ाई के अधिकार से वंचित हैं। यह सब जानते हुए भी बेसिक शिक्षा विभाग चुप्पी साधे हुए है। खास बात तो यह है कि स्कूल चलो अभियान के तहत निशक्त बच्चों का भी स्कूलों में पंजीयन तो करा दिया गया है, लेकिन यह परिषदीय स्कूलों में सिर्फ बैठे रहते हैं। परिषदीय स्कूलों में तैनात सामान्य शिक्षक इन्हें पढ़ाना भी चाहें, तो यह उनके बूते की बात नहीं है।
बीएसए शिवेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि सर्वे में शामिल सभी निशक्त बच्चों का परिषदीय स्कूलों में दाखिला है। विभाग का प्रयास है कि सभी निशक्त बच्चों के पढा़ई की व्यवस्था हो। ऐसे में सामान्य शिक्षक भी स्कूलों में पंजीकृत बच्चों को पढ़ाने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं।