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पराली प्रबंधन करना किसानों के लिए टेढ़ीखीर

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ट्रैक्टर से खेत की पराली हटाते किसान - फोटो : FATEHPUR
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फतेहपुर में धान की फसल काटने के बाद पराली प्रबंधन कराना किसानों के लिए डेढ़ी खीर बना हुआ है। जिन किसानों ने हार्वेस्टर से धान की फसल कटा ली है। उनको खेत से पराली हटाने के लिए न तो मजदूर मिल रहे हैं और न ही किराये पर पराली प्रबंधन वाले कृषियंत्र मिल रहे हैं। ऐसे में पराली को सुरक्षित कराना किसानों के मुसीबत बना हुआ है।
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मजदूरों से धान की महंगी कटाई और समय पर मजदूर न मिलने की वजह से किसान हार्वेस्टर मशीनों का सहारा ले रहे हैं। धान कटाई के समय उत्पाद को निकालने के बाद पराली खेत में फैल जाती है। उसको इकट्ठा करने के झंझट से बचने के लिए किसान खेत में पड़ी पराली पर आग लगा देते हैं, लेकिन बढ़ते प्रदूषण को लेकर सरकार ने पराली जलाने पर रोक लगा दी है।
साथ ही किसी किसान के द्वारा पराली जलाए जाने पर जुर्माना, सजा और कृषि विभाग की योजनाओं से वंचित करने के भी निर्देश जारी किए गए हैं। सजा और जुर्माना के डर से किसान पराली में आग नहीं लगा रहे हैं, लेकिन पराली प्रबंधन भी करना किसानों के लिए मुसीबत बना हुआ है। इसकी वजह यह है कि पर्याप्त मात्रा में कृषियंत्र नहीं हैं। किसानों को किराये पर भी पराली प्रबंधन वाले कृषियंत्र नहीं मिल पा रहे हैं।
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